अमृतसरः धर्मी फौजी बलदेव सिंह ने जून 1984 के घल्लूघारे से जुड़े मामलों को लेकर सिख समुदाय के प्रतिनिधियों और सिंह साहिबानों के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को वे इस मामले पर चर्चा करने और सिंह साहिबानों से मिलने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय पहुंचे थे, लेकिन उन्हें वहां जाने या मुलाकात करने का मौका नहीं दिया गया।
मीडिया से बात करते बलदेव सिंह ने बताया कि वे पहले भी दो बार सिंह साहिबानों के सामने जून 1984 का मुद्दा उठा चुके हैं। उनके अनुसार जब तक इस गंभीर मुद्दे का कोई समाधान नहीं निकल आता, तब तक इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मुलाकात के लिए समय मांगा, तो उन्हें बताया कि कोई समय उपलब्ध नहीं है। उन्होंने एक निजी सहायक (PA) के जरिए भी बात पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन उस माध्यम से भी कोई समय नहीं मिल सका। बलदेव सिंह ने कहा कि सिख समुदाय को जून 1984 में श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर हुए सैन्य हमले और उसमें हुई जान-माल की हानि को याद रखने के साथ-साथ, उसके बाद की परिस्थितियों और धर्मी फौजियों द्वारा दिए बलिदानों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उन लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भी समय नहीं है, जिन्होंने अपने धर्म और समुदाय के लिए बलिदान दिया है, तो फिर सिख कौम के सामने मौजूद गंभीर मुद्दों का समाधान कैसे होगा। उन्होंने सिंह साहिबानों से अपील की कि वे जून 1984 के मामले को उतनी गंभीरता से लें, जितनी इसकी मांग है, और इस पर कोई ठोस निर्णय लें। उन्होंने तर्क दिया कि यदि जून 1984 जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पंथिक मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता, तो फिर सिख समुदाय के सामने मौजूद अन्य चुनौतियों के समाधान की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
