चंडीगढ़, 4 जून: पंजाब सरकार ने राज्य के कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने छह प्रमुख कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा आधार पर लाने और अन्य वैध मांगों के समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पहले ही संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा श्रेणी में शामिल करने का निर्णय ले चुकी है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रक्रिया जारी है और विभिन्न विभागों द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
कर्मचारियों की मांगों पर तेज कार्रवाई के निर्देश
हरपाल सिंह चीमा ने संबंधित विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों, कार्मिक विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कर्मचारियों की वास्तविक और वैध मांगों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
उन्होंने कहा कि सभी विभागों को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए ताकि कर्मचारियों को जल्द राहत मिल सके। वित्त मंत्री ने दोहराया कि सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
छह प्रमुख यूनियनों के प्रतिनिधियों ने रखीं मांगें
कर्मचारी मुद्दों के समाधान के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी के अध्यक्ष के रूप में हरपाल सिंह चीमा ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की।
बैठक में ऑल पंजाब DST/CTS कॉन्ट्रैक्ट इंस्ट्रक्टर यूनियन, पंजाब राज्य सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल अध्यापक एवं अन्य कर्मचारी यूनियन, आदर्श स्कूल टीचिंग एंड नॉन-टीचिंग मुलाजिम यूनियन, ठेका मुलाजिम संघर्ष मोर्चा, पंजाब रोडवेज/पनबस/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन तथा पंजाब रोडवेज (पनबस) स्टेट ट्रांसपोर्ट वर्कर यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हुए।
यूनियनों के प्रतिनिधियों ने अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को सरकार के समक्ष रखा। वित्त मंत्री ने सभी पक्षों को ध्यानपूर्वक सुना और अधिकारियों को इन मामलों की समीक्षा कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सरकार का कहना है कि कर्मचारियों से नियमित संवाद और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों की भी रक्षा की जा सके।
