चण्डीगढ़: लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार की ओर से लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) मुख्य रूप से गाय एवं अन्य गौवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाली एक संक्रामक विषाणु जनित बीमारी को लेकर एक एडवाइजरी जारी की गई है। यह बीमारी लम्पी स्किन डिजीज वायरस (एलएसडीवर) के कारण होती है, जो पॉक्स विरिडी परिवार तथा कैप्रिपॉक्स वायरस समूह से संबंधित है।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस बीमारी से प्रभावित पशुओं में शरीर की लसीका ग्रंथियों में सूजन, पैरों, पेट के निचले हिस्से एवं थन के आसपास सूजन, भूख कम होना, कमजोरी, वजन कम होना, दूध उत्पादन में कमी तथा प्रजनन संबंधी समस्याएं भी देखी जा सकती है।
पशुशाला एवं आसपास पानी जमा न होने दें और कीटों के प्रजनन वाले स्थानों को साफ रखें। पशुओं तथा उनके आसपास की जगह पर कीटनाशक अथवा टिक नियंत्रण की दवा का उपयोग केवल अनुशंसित मात्रा और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार किया जाए। यदि बीमारी से किसी पशु की मृत्यु हो जाए तो शव को खुले में न छोड़ें और निर्धारित पशु चिकित्सा एवं जैव-सुरक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षित तरीके से निपटान करें।
प्रवक्ता ने बताया कि लम्पी स्किन डिजीज से बचाव के लिए बीमारी की समय पर पहचान, प्रभावित पशुओं को अलग रखना, सही नमूना लेकर समय पर जांच करवाना, पशुओं की अनावश्यक आवाजाही रोकना, मच्छर-मक्खियों एवं टिक्स पर नियंत्रण रखना, स्वस्थ पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाना तथा पशु चिकित्सकों को तुरंत सूचना देना बेहद जरूरी है।