जालंधरः पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सिख तालमेल कमेटी और विभिन्न सिख संगठनों ने सिख समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा उठाया है। जालंधर में आयोजित बैठक के दौरान संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि शहर की चारों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दलों की ओर से सिख चेहरे को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सभी पार्टियों से मांग की कि उम्मीदवारों के चयन में सिख समुदाय को भी बराबर का अवसर दिया जाए। ऐसा नहीं होने पर संगठनों ने चुनावों में वोट बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
बैठक में सिख नेताओं ने कहा कि पंजाब गुरु-पीरों की धरती है और यहां सिख समुदाय की अहम भूमिका रही है। उनका आरोप है कि राजनीतिक दल सिख मतदाताओं के समर्थन से सत्ता हासिल करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उम्मीदवारों के चयन के समय समुदाय की अनदेखी की जाती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में सिख प्रतिनिधियों की संख्या बढ़नी चाहिए, ताकि वे पंजाब के अधिकारों और समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकें।
सिख तालमेल कमेटी के प्रतिनिधियों ने आम आदमी पार्टी, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल सहित सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि टिकटों के बंटवारे में सिख उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाए। नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी दूसरे समुदाय को पीछे करना नहीं, बल्कि सिखों को भी समान राजनीतिक अवसर दिलाना है। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल से भी आग्रह किया कि यदि पार्टी किसी अन्य दल के साथ गठबंधन या चुनावी समझौता करती है, तो उससे पहले सिख उम्मीदवारों को उचित प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा उठाया जाए।
भाजपा को लेकर भी उन्होंने कहा कि पार्टी में सिख चेहरे मौजूद हैं, इसलिए टिकट वितरण में उन्हें अवसर मिलना चाहिए। बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि वे जालंधर में ही जन्मे और पले-बढ़े हैं तथा पिछले कई दशकों के राजनीतिक घटनाक्रम को देखते आ रहे हैं। उनके मुताबिक, शहर की चारों विधानसभा सीटों पर सिख समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा। उन्होंने विशेष रूप से सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावों में सिखों के वोट मांगे जाते हैं, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती।
सिख संगठनों ने कहा कि वे अपने धार्मिक और सामाजिक सरोकारों के चलते एकजुट हुए हैं। उनकी मांग है कि राजनीतिक दल अधिक से अधिक सिख उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारें, ताकि समुदाय की आवाज विधानसभा तक पहुंच सके।
बैठक के दौरान नेताओं ने कहा कि चुनाव के समय सिख समुदाय को केवल मतदाता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में भी उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टियों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो इसका विरोध चुनावों में किया जाएगा और वोट बहिष्कार का विकल्प अपनाया जा सकता है।
सिख तालमेल कमेटी और अन्य संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा करते समय सिख समुदाय के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखने की अपील की।
