नई दिल्ली : सुपर अल नीनो के कारण साल 2026 में पूरी दुनिया में बारिश के पैटर्न बदलते जा रहे हैं और तापमान भी बढ़ता जा रहा है। इसको देखते हुए क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने एक नया टूल अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर बनाया है। यह टूल बता रहा है कि अल नीनो की गर्मी से इंसानों को कितना खतरा होगा। यह ट्रैकर हर महीने का डेटा देता है इसमें अगले 6 महीनों तक होने वाली संभावित मौतों के अनुमान भी शामिल है।
जून में अल नीनो की शुरुआत के बाद से ही गर्मी के कारण हुई मौतों की संख्या बताता है। दुनियाभर के राज्यों का डेटा देकर यह टूल फंड देने वालों और काम करने वालों को सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी देता है। इससे ये पता लगाने में आसानी होती है कि संसाधनों की सबसे ज्यादा जरुरत कहां पर है और कहां लोगों की जान बचाई जा सकती है।
इतने लोगों की बच सकती है जान
अब इस ट्रैकर में मार्च तक का डेटा शामिल हो गया है। इसके अनुसार, अल नीनो के चलते बढ़ी हुई गर्मी से कुल लगभग 8,57.000 मौतें हो सकती है। इसमें से लगभग 3,73,300 मौतें अगले 3 महीनों में हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह शोध नई पूर्वानुमान क्षमताओं का इस्तेमाल करके एक बहुत ही जरुरी सवाल का जवाब देगा। भीषण गर्मी के कारण कहां पर लोगों की जान जा सकती है।
उनका कहना है कि भीषण गर्मी के जानलेवा असर का पहले से अंदाज लगा पाना बड़ा कदम है। ऐसे में यह पहले पता किया जा सकता है कि लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है। लोगों की जान जाने से पहले जरुरी कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह ट्रैकर उस सुपर अल नीनो के बारे में जानकारी देता है जिसका सामना हम आज कर रहे हैं।
मार्च में हुई सबसे ज्यादा मौतें
अल नीनो के कारण गर्मी से सबसे ज्यादा होने वाली मौतें विकासशील देशों में हुई है। अगले 6 महीनों के ताजा डेटा के अनुसार, अनुमान है कि अल नीनो की गर्मी से नाइजीरिया में सबसे ज्यादा मौतें हो सकती है। इन 6 महीनों के दौरान वहां पर लगभग 56,000 लोगों की जान जा सकती है। इसके बाद अब भारत का नंबर है जहां गर्मी से लगभग 55,000 मौतें होने की आशंका जताई जा रही है।
