अमृतसरः शहर के हॉल बाजार में स्थित जामा मस्जिद में मुस्लिम समुदाय द्वारा ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर सुबह से ही बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद में नमाज अदा करने पहुंचे। नमाज मौलाना मुहम्मद अमद हुसैन कासमी ने अदा करवाई, जिसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और ईद के मौके पर मुबारकबाद दी। पंजाब कमेटी के सदस्य मोहम्मद यूसुफ मलिक ने कहा कि ईद-उल-अजहा का त्योहार न केवल त्याग का संदेश देता है, बल्कि मानवता, प्रेम और भाईचारे का संदेश भी देता है। यह त्योहार हजरत इब्राहिम (उन पर शांति हो) और उनके बेटे के त्याग की याद में मनाया जाता है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
इसके साथ ही, मुस्लिम समुदाय ने कहा कि त्याग का असली अर्थ केवल जानवरों का त्याग करना नहीं है, बल्कि अपने भीतर की बुराई, अहंकार और स्वार्थ को छोड़कर गरीबों, पीड़ितों और जरूरतमंदों की मदद करना भी है। धर्म चाहे कोई भी हो—हिंदू, सिख या मुस्लिम—सभी को आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ रहना चाहिए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कहा कि इस दिन देश में शांति, प्रगति और भाईचारे के लिए नमाज अदा की गई। भारत की सुंदरता उसकी एकता और विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच प्रेम में है और इसे बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। इस मौके पर जामा मस्जिद में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे और यह त्योहार पूरी तरह से शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया।

