CPI Inflation: देश में अप्रैल महीने के दौरान आम लोगों को महंगाई का झटका लगा है। सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक रिटेल महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि मार्च महीने में यह 3.40 फीसदी थी। यानी महंगाई में 0.08 फीसदी का इजाफा हुआ है।
खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी मानी जा रही है। खासकर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से लोगों का बजट प्रभावित हुआ है। सब्जियां, अनाज और अन्य जरूरी सामान पहले के मुकाबले महंगे हुए हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
लगातार छठे महीने बढ़ी महंगाई
अक्टूबर 2025 के बाद से देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। अक्टूबर 2025 में रिटेल महंगाई दर घटकर 0.25 फीसदी तक पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद से हर महीने इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अप्रैल 2026 ऐसा लगातार छठा महीना है जब महंगाई दर में इजाफा हुआ है।
फूड इंफ्लेशन में भी तेजी
खाद्य महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित खाद्य महंगाई दर 4.20 फीसदी रही है। मार्च महीने में यही आंकड़ा 3.87 फीसदी था। इससे साफ है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
गांवों में ज्यादा बढ़ी खाद्य महंगाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई शहरी इलाकों के मुकाबले ज्यादा रही है। गांवों में खाद्य महंगाई दर 4.26 फीसदी दर्ज की गई, जबकि शहरों में यह 4.10 फीसदी रही। इसका मतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर महंगाई का असर ज्यादा पड़ा है।
मिडिल ईस्ट संकट बढ़ा सकता है परेशानी
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। तेल की कीमतों और आयात पर असर पड़ने से रोजमर्रा की चीजें और महंगी हो सकती हैं, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
