NATMO की मानचित्र प्रदर्शनी और यंग जियोग्राफर अवॉर्ड रहे आकर्षण का केंद्र
ऊना: राजकीय महाविद्यालय ऊना के भूगोल विभाग तथा जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ हिमाचल प्रदेश (GSHP) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं GSHP की पांचवीं वार्षिक बैठक का शनिवार को समापन हुआ। “अनिश्चितता के दौर में भूगोल एवं अनुकूलनशील शासन व्यवस्था: आजीविका, स्थानिक न्याय और एक सुदृढ़ भारत” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और भूगोल विशेषज्ञों ने समकालीन चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी के दौरान राष्ट्रीय एटलस एवं विषयगत मानचित्रण संगठन (NATMO) द्वारा लगाई गई विशेष मानचित्र प्रदर्शनी तथा यंग जियोग्राफर अवॉर्ड के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिता के परिणाम भी प्रमुख आकर्षण रहे।
समापन समारोह में ऊना के अतिरिक्त उपायुक्त एवं आईएएस अधिकारी ईशांत जसवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय पहुंचने पर उनका पारंपरिक हिमाचली रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया तथा उन्हें हिमाचली टोपी और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने संगोष्ठी की विषयवस्तु की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए भूगोल को वर्तमान समय की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का महत्त्वपूर्ण माध्यम बताया।
NATMO की मानचित्र प्रदर्शनी में हिमाचल की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विरासत की झलक
संगोष्ठी के दौरान भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय एटलस एवं विषयगत मानचित्रण संगठन (NATMO) द्वारा विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें विभिन्न प्रकार के मानचित्रों एवं एटलस का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से संबंधित जिला नियोजन मानचित्र श्रृंखला (District Planning Map Series—DPMS) ने ध्यान आकर्षित किया। इसके अतिरिक्त कल्चरल हेरिटेज एटलस, शक्तिपीठों से संबंधित मानचित्र, भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology) तथा प्रोफेसर एस. पी. चटर्जी के महत्त्वपूर्ण कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया।
इस प्रदर्शनी के माध्यम से प्रतिभागियों और विद्यार्थियों को मानचित्रण, जिला नियोजन, हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक विशेषताओं तथा सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला। प्रदर्शनी ने भूगोल के व्यावहारिक और शोधपरक पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया तथा मानचित्रों के माध्यम से किसी क्षेत्र की प्राकृतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने के महत्त्व को रेखांकित किया।
इस प्रदर्शनी में NATMO की ओर से डॉ. कुंतला घोष, सर्वजीत कुमार, डॉ. सकरीन हसन तथा राहुल बसु ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा प्रदर्शित मानचित्रों एवं एटलस ने संगोष्ठी में अकादमिक चर्चा को एक व्यावहारिक आयाम प्रदान किया।
यंग जियोग्राफर अवॉर्ड में जाह्नवी ठाकुर ने हासिल किया प्रथम स्थान
राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित यंग जियोग्राफर अवॉर्ड प्रतियोगिता के तीसरे चरण में प्रतिभागियों ने अपनी भौगोलिक समझ एवं विषयगत ज्ञान का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला की जाह्नवी ठाकुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। नितिन रावत ने द्वितीय तथा बिहार की निहारिका ने तृतीय स्थान हासिल किया। इसके अतिरिक्त इश्तियाक अहमद और दिलावर हुसैन ने भी प्रतियोगिता में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
समापन समारोह के दौरान सभी चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इस पहल का उद्देश्य भूगोल के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा उनमें शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति रुचि विकसित करना है। प्रतियोगिता ने युवा भूगोलवेत्ताओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर हुआ मंथन
संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज भूगोल का अध्ययन केवल पृथ्वी की संरचना और प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, आजीविका, पलायन, शहरीकरण, पर्यावरण संरक्षण और विकास की प्रक्रियाओं को समझने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि विकास की योजनाओं को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना, स्थानीय समुदायों की आजीविका की सुरक्षा तथा सतत विकास की अवधारणा को व्यवहार में उतारना समय की प्रमुख आवश्यकता है।
वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएं पूरी हों और आने वाली पीढ़ियों के संसाधन एवं संभावनाएं भी सुरक्षित रहें। इसके लिए भौगोलिक अध्ययन, वैज्ञानिक शोध, प्रभावी नीतियों और स्थानीय परिस्थितियों की समझ के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। संगोष्ठी में प्रस्तुत शोधपत्रों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी विकास, कृषि, जल प्रबंधन, प्रवासन, जलवायु परिवर्तन और आजीविका से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधकर्ताओं एवं प्राध्यापकों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, क्षेत्रीय असमानताओं, पर्यावरणीय चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर शोधपरक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शोध को नीतिगत निर्णयों और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर प्रोफेसर हरप्रीत सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी; प्रोफेसर गौरव कालोत्रा, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़; डॉ. मनजीत सिंह, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय; प्रोफेसर शुभकांत महापात्र तथा NATMO, कोलकाता से जुड़े राहुल बसु सहित अनेक विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से आए विशेषज्ञों की सहभागिता ने संगोष्ठी के अकादमिक महत्त्व को और समृद्ध किया।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली तथा राष्ट्रीय एटलस एवं विषयगत मानचित्रण संगठन (NATMO), कोलकाता के सहयोग से किया गया। आयोजन ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विचारों के आदान-प्रदान तथा शोध के नए आयामों पर चर्चा करने का साझा मंच प्रदान किया।
आयोजन समिति एवं महाविद्यालय परिवार का सराहनीय योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. नविता शर्मा, सह-संयोजक प्रोफेसर सनी शर्मा तथा आयोजन सचिव प्रोफेसर विकास सैनी की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। इनके समन्वय से कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों का संचालन व्यवस्थित रूप से किया गया।
महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों ने विभिन्न समितियों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए आयोजन को सफल बनाने के लिए अथक परिश्रम किया। वहीं, गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने भी व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीता शर्मा के विशेष सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की भी सराहना की गई। उनके सहयोग से आयोजन की विभिन्न गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संपन्न करने में सहायता मिली।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ने भूगोल के अकादमिक एवं सामाजिक महत्त्व को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, आजीविका की सुरक्षा और सुदृढ़ भारत के निर्माण की दिशा में सार्थक संवाद का अवसर प्रदान किया। वहीं, NATMO की मानचित्र प्रदर्शनी और यंग जियोग्राफर अवॉर्ड ने भूगोल के व्यावहारिक, शोधपरक एवं शैक्षणिक पक्ष को प्रमुखता से सामने रखा।