1200 लोगों पर एफआईआर दर्ज
मानसाः परमिंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए चल रहे संघर्ष के 23वें दिन एक बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों और एक्शन कमेटी के बीच करीब 5 घंटे तक चली लंबी बैठक के बाद कई अहम मांगों पर सहमति बन गई है।
बैठक में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और पुलिस के उच्च अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में जेलों में बंद लक्खा सिधाना समेत अन्य नेताओं की रिहाई को लेकर सहमति बनी है। एक्शन कमेटी का कहना है कि नेताओं के जेल से बाहर आने के बाद ही झोटा का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा और उसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
वहीं, झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिया गया है। इसके अलावा दलजीत सिंह भम्मे के परिवार को भी नौकरी और मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है।
उधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने परविंदर सिंह झोटा की हत्या के आरोपी का घर और दुकान ढहाए जाने के मामले में पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आरोपी की संपत्ति किस कानून और किस कानूनी प्रक्रिया के तहत गिराई गई। अदालत ने 15 दिसंबर को मामले की अगली सुनवाई पर कार्रवाई से जुड़ी पूरी जानकारी पेश करने का आदेश दिया है। वहीं पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज कर ली है। मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान को ध्वस्त किए जाने के मामले में 1200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज भी किया गया है।
एक्शन कमेटी के मीडिया इंचार्ज हरदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि बैठक के दौरान सबसे ज्यादा पेच लक्खा सिधाना और अन्य नेताओं की रिहाई को लेकर फंसा रहा। एक्शन कमेटी नेताओं की रिहाई के बिना पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं थी।
उन्होंने बताया कि ख्याला कलां में झोटा के नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए एक सप्ताह के भीतर मंजूरी देने पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा संबंधित पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध उच्च स्तरीय जांच करवाने का भरोसा दिया गया है।
वहीं झोटा की याद में उनका स्मारक या प्रतिमा लगाने पर भी सहमति बनी है, लेकिन घटना वाली जगह पर प्रतिमा लगाने को लेकर सहमति नहीं बन पाई। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना था कि घटनास्थल निजी संपत्ति होने के कारण वहां प्रतिमा लगाने में कानूनी अड़चन आ सकती है।
एक्शन कमेटी ने गिरफ्तार नेताओं की बिना शर्त रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा 13 अक्टूबर से शुरू संघर्ष के दौरान भम्मे कलां, बुढलाडा और अकालिया से संबंधित दर्ज मामलों, पंजाब भर में फ्लेक्स फाड़ने के मामलों तथा झोटा के पिता और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मुकदमों को रद्द करने की मांग भी शामिल है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद 5 नवंबर को मुख्यमंत्री की रिहायश के घेराव का ऐलान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से किए इन आश्वासनों को कितनी जल्दी अमलीजामा पहनाया जाता है और जेलों में बंद नेताओं की रिहाई कब तक होती है।
