नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 2047 तक भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य रखा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत की आबादी 1.4 अरब थी। यह आबादी 2050 तक 1.7 अरब पहुंचने का अनुमान है। वहीं रिपोर्ट में यह कहा गया है कि विकसित भारत 2047 में कोई भूखा नहीं रहेगा। ऐसे में इसको लेकर अब कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सरकार पर निशाना साधा है।
अभिजीत दीपके ने एक्स पर शेयर की पोस्ट
अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में उन्होंने कहा कि – ‘क्या ऐसा कुछ है जो 2047 से पहले किया जाएगा’। रिपोर्ट के अनुसार, इतनी बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए भारत को खाद्यान का उत्पादन बढ़ाने की जरुरत पड़ेगी। एक अनुमान के अनुसार यदि ऐसे ही चलता रहा तो देश में 2047-48 में पोषण वाले अनाज, मक्का, दाल, फल, खाद्य तेल और दूध की सप्लाई डिमांड भी कम ही होगी।
Is there anything that would be done before 2047?
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 28, 2026
खाद्यान का बढ़ जाएगा उत्पादन
रिपोर्ट के अनुसार, 2047-48 में देश में खाद्यान का उत्पादन 457 मिलियन टन रहने का अनुमान है। वहीं डिमांड 402 मिलियन टन रहेगा। कृषि मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में देश में खाद्यान उत्पादन 376.56 मिलियन टन रह सकती है। 2047-48 में देश में अनाज का उत्पादन 409 मिलियन टन रहेगा। वहीं डिमांड 353 मिलियन टन रहने की संभावना जताई जा रही है। देश में खाद्यान और अनाज का उत्पादन डिमांड से ज्यादा होगा।
सब्जियों के मामले में आत्मनिर्भर रहेगा भारत
20 साल के बाद देश में चावल का उत्पादन 154 मिलियन टन और मांग 114 मिलियन टन तक रहेगी। वहीं गेंहू का उत्पादन 160 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा। गेंहू की मांग 119 मिलियन टन रहेगी। सब्जियों का उत्पादन 2047-48 में 367 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। सब्जियों की डिमांड 365 मिलियन टन रहेगी। सब्जियों के मामले में भारत पूरी तरह से आत्मनिर्भर होगा।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कई मामले में भारत में डिमांड और सप्लाई का गैप रहेगा। पोषण वाले अनाज, मक्का, दालें, फल, खाद्य तेल और दूध की कमी रहेगी। डिमांड प्रोड्क्शन से भी दोगुनी होगी।
