विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक
ऊना: स्काॅलर्स यूनिफाइड सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ऊना में प्रख्यात पर्यावरण विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद् प्रो. संजीव शर्मा का आगमन हुआ। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन तथा सतत विकास के महत्व पर एक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। उनके आगमन से विद्यालय में एक विशेष शैक्षणिक वातावरण का निर्माण हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को समझने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पहचानने का अवसर मिला।
प्रो. संजीव शर्मा पर्यावरण अध्ययन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाले प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता हैं। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं तथा पर्यावरण अध्ययन एवं शोध से संबंधित शैक्षणिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वे विश्वविद्यालय में विद्यार्थी कल्याण एवं शैक्षणिक प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी कर चुके हैं।
उन्होंने अपने लगभग डेढ़ दशक से अधिक के व्यावसायिक अनुभव के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं संगठनों के साथ कार्य किया है, जिनमें भारत सरकार के विभिन्न विभाग, WWF-India तथा भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), मोहाली सहित अन्य संस्थान शामिल हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने IISER मोहाली से पोस्ट-डॉक्टरेट किया है तथा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली से पर्यावरण कानून एवं नीति में स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी प्राप्त किया है। उनकी शोध विशेषज्ञता में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय नियोजन तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
उन्होंने हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, पर्यावरणीय चुनौतियों तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी कार्य किया है। पर्यावरण संबंधी विषयों पर उनके शोध, शैक्षणिक गतिविधियों और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सहभागिता ने इस क्षेत्र में उनके अनुभव को और समृद्ध किया है। अपने व्याख्यान के दौरान प्रो. संजीव शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं और इनका प्रभाव प्रकृति के साथ-साथ मानव जीवन पर भी पड़ रहा है। ऐसे में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिक विशेषताओं तथा पर्यावरण संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका पर भी अपने विचार साझा किए।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की प्रमुख आवश्यकता है। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, संसाधनों का उचित उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल आदतों को अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति सकारात्मक बदलाव ला सकता है। प्रो. शर्मा ने विद्यार्थियों को पर्यावरणीय समस्याओं को केवल सैद्धांतिक रूप से पढ़ने के बजाय उन्हें व्यावहारिक जीवन से जोड़कर समझने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। उनके विचारों ने विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका समझने तथा स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंध निदेशक धीरज शर्मा ने प्रो. संजीव शर्मा का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विद्यालय में पधारने, विद्यार्थियों के साथ अपने बहुमूल्य ज्ञान एवं अनुभव साझा करने तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए उनका धन्यवाद किया। धीरज शर्मा ने कहा कि अनुभवी विशेषज्ञों के साथ इस प्रकार का संवाद विद्यार्थियों के ज्ञान को समृद्ध करने के साथ-साथ उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है।
ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है।
विद्यालय प्रबंधन ने प्रो. संजीव शर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इस ज्ञानवर्धक सत्र के लिए उनका धन्यवाद किया। यह व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अनुभव रहा, जिसने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।