नई दिल्ली: आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान का अब दोहरा चेहरा सामने आ चुका है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ठोस सबूत दिखाते हुए एक बार फिर से यह याद करवा दिया है कि पाकिस्तान के पास भारत के जम्मू-कश्मीर और उसके आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई भी अधिकार नहीं है। प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने असाधारण परिस्थितियों में अंतिम संस्कारों के अधिकारों के विषय पर धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता से जुड़े विशेष प्रतिवेदक के साथ हुई बातचीत में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को आईना भी दिखाया है।
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Bhavika Mangalanandan, First Secretary, took part in the interactive dialogue with the Special Rapporteur on Freedom of Religion and Belief on the topic of funeral rights in-exceptional circumstances. She made the following observations:
➡️ Report attributes all wrong practices during COVID-19 only to the Global South, turning a blind eye to similar tragic situations in the developed world.
➡️ Fervent advocacy made for rights of terrorists who violate the most sacred human right – the right to life!
➡️ Deeply ironic that a State that did not even accept the bodies of its own soldiers who were killed in combat in 1999 in Kargil, unabashedly speaks with fervor on faith, religious freedom and burial rights.
➡️ Reminded delegate of Pakistan that it was the Indian Army who buried a number of Pakistani soldiers with military honours and in accordance with Islamic rites.
➡️ Advised that Pakistan’s deep obsession with the Indian Union Territory of Jammu & Kashmir should be directed at the developments underway in the parts of Jammu & Kashmir under its illegal occupation, such as Rawalakot.
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— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) October 22, 2026
अधिकार का उल्लंघन हुआ
भाविका ने कहा कि रिपोर्ट में कोविड-19 के दौरान सभी गलत प्रैक्टिस के लिए सिर्फ ग्लोबल साउथ को ही जिम्मेदार ठहराया है। वहीं विकसित देशों में भी ऐसी ही दुखद स्थिति देखने को मिली है। इनको पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया है। उन आतंकवादियों के अधिकारों की पूरी तरह से वकालत भी की गई है। यह सबसे पवित्र मानवाधिकार का उल्लंघन करते हैं।
पाकिस्तान पर भड़की प्रथम सचिव
प्रथम सचिव ने कहा कि – यह बहुत ही अटपटी बात है कि जो देश 1999 में कारगिल की लड़ाई में मारे जाने वाले अपने सैनिकों का शव स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था आज वो आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और दफनाने के अधिकारों पर बड़े जोश के साथ बात कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिनिधि को याद भी करवाया है कि भारत की सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों को पूरे सैन्य सम्मान और इस्लाम के रीति रिवाजों के अनुसार, दफनाया था।
प्रथम सचिव ने पाकिस्तान को यह कह दिया है कि भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मी को लेकर उनका गहरा जूनून है। उसको अपने अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के हिस्सों में होने वाले विकास कार्यों की ओर मुड़ जाना चाहिए।
पाकिस्तान में कई अल्पसंख्यक समुदाय ऐसे हैं जिनकी संख्या घट रही है। उनके अधिकारों को दफनाया जा रहा है। ऐसा देश जो अपने ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं देख पा रहा उसको भारत को उपदेश देने का भी कोई अधिकार नहीं है।