मोहालीः मोगा में जुलाई 2020 में एक कारोबारी की हत्या के बाद अतिरिक्त दुर्घटना बीमा राशि देने से इन्कार करने पर पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने एलआइसी को चार बीमा पालिसियों के तहत 26.50 लाख रुपये का दोहरा दुर्घटना लाभ देने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल हत्या को सुनियोजित अपराध बताकर अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ देने से इन्कार नहीं किया जा सकता। आयोग ने परिवार को 50 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने के भी निर्देश दिए हैं।
आयोग के न्यायिक सदस्य एचपीएस महल और सदस्य किरण सिब्बल की पीठ ने कारोबारी की पत्नी, नाबालिग बेटे और मां की अपील पर यह फैसला सुनाया। इससे पहले मोगा जिला उपभोक्ता आयोग ने 29 नवंबर 2022 को परिवार की शिकायत खारिज कर दी थी। राज्य आयोग ने 13 अक्टूबर को सुनाए फैसले में जिला आयोग का आदेश रद करते हुए एलआइसी की सेवा में कमी मानी। कारोबारी तजिंदर सिंह कंबो की 14 जुलाई 2020 को उनकी दुकान पर अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी। उनकी पत्नी रिपनदीप कौर कंबो चारों बीमा पालिसियों में नामित थीं।
इन पालिसियों के तहत पांच लाख, 10 लाख, 1.60 लाख और 10 लाख रुपये की बीमा राशि निर्धारित थी। एलआइसी ने कारोबारी की मृत्यु के बाद मूल बीमा राशि का भुगतान कर दिया, लेकिन अतिरिक्त दुर्घटना लाभ देने से इन्कार कर दिया। एलआइसी ने 30 अप्रैल 2021 को जारी अस्वीकृति पत्र में हत्या को सुनियोजित बताते हुए इंटरनेट मीडिया पर कथित हमलावर की एक पोस्ट और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट का हवाला दिया था। निगम का कहना था कि हत्या गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह उर्फ सुखा गिल लम्मे से जुड़ी थी और इसका उद्देश्य क्षेत्र में आतंक पैदा करना था।
परिवार ने आयोग में दलील दी कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे साबित हो कि मृतक का गैंगस्टरों की गतिविधियों से संबंध था या उसने हमले को उकसाया था। आयोग ने भी पाया कि कथित विवाद की पुष्टि प्राथमिकी या मोगा के डीएसपी सिटी की रिपोर्ट से नहीं होती। रिकार्ड में मृतक को पहले धमकी दिए जाने या आरोपितों के साथ उसकी किसी बातचीत का प्रमाण भी नहीं मिला। आयोग ने कहा कि हमलावरों का हत्या करने का इरादा और यह सवाल कि उससे हुई मृत्यु बीमा पालिसी के तहत दुर्घटनावश हुई मृत्यु की श्रेणी में आती है या नहीं, दोनों अलग-अलग विषय हैं।
किसी आपराधिक घटना का पहले से नियोजित होना अपने आप में अतिरिक्त दुर्घटना लाभ खारिज करने का आधार नहीं बन सकता। फैसले में एलआइसी के 15 अक्टूबर 2007 के परिपत्र का भी उल्लेख किया गया। इसके अनुसार, यदि पुलिस रिकार्ड से यह संकेत नहीं मिलता कि हत्या मृतक द्वारा स्वयं उकसाई गई थी या दावेदार की उसमें कोई भूमिका थी, तो दुर्घटना लाभ का दावा रोका नहीं जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि एलआइसी यह साबित नहीं कर सकी कि कारोबारी की मृत्यु पालिसी के दायरे से बाहर थी।
निगम ने लाभ देने से इन्कार करने के समर्थन में कोई ऐसा अपवाद संबंधी प्रविधान भी प्रस्तुत नहीं किया, जो इस मामले में लागू होता। आयोग ने चारों पालिसियों के तहत दोहरा दुर्घटना लाभ देने के साथ 30 अप्रैल 2021 से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 50 हजार रुपये की संयुक्त मुआवजा राशि और मुकदमे का खर्च भी देना होगा। यह राशि कारोबारी की पत्नी, नाबालिग बेटे और मां को बराबर हिस्सों में दी जाएगी। आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। परिवार ने कुल 26.60 लाख रुपये का दावा किया था, हालांकि आयोग ने अंतिम देय राशि का अलग से निर्धारण नहीं किया।
