चंडीगढ़: हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रहने वाले बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक महत्वपूर्ण वैधानिक परामर्श जारी किया है। आयोग की अध्यक्षा तृप्ति श्योराण द्वारा बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 की धारा 13 (1) (ए) के तहत यह कदम उठाया गया है। आयोग के दौरों में यह बात सामने आई थी कि कई संस्थानों में सीसीटीवी सिस्टम को व्यक्तिगत मोबाइल फोन और लैपटॉप से जोड़ा गया है, जिससे लाइव फुटेज कहीं से भी एक्सेस, डाउनलोड या वायरल की जा सकती है, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सीसीटीवी सिस्टम, उसकी फुटेज और पासवर्ड पर केवल संस्थान के प्रभारी का नियंत्रण रहेगा तथा साझा पासवर्ड के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। कैमरों को किसी भी निजी मोबाइल या लैपटॉप से जोड़ना सख्त वर्जित किया गया है और रिमोट एक्सेस को बाय-डिफॉल्ट बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, सीसीटीवी मॉनिटर की फोटो, स्क्रीन रिकॉर्डिंग या फुटेज को व्हाट्सएप, सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से डाउनलोड, कॉपी या प्रसारित करने पर रोक लगाई गई है।
आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी उपायुक्तों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को इस परामर्श की अनुपालना रिपोर्ट 15 दिन के भीतर सौंपने के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। आयोग का मानना है कि सीसीटीवी निगरानी का उद्देश्य केवल संस्थागत सुरक्षा और बाल संरक्षण होना चाहिए, न कि बच्चों की निजता का उल्लंघन। यह परामर्श बच्चों के सर्वोत्तम हित और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए पूरी सख्ती के साथ लागू किया जा रहा है।
