शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने अपनी मातृभाषा और स्थानीय बोलियों पर गर्व करने के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने और समझने के लिए तत्पर रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से प्राचीन भारतीय लिपियों के पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए शोध संबंधी पहल करने का भी आह्वान किया।

राज्यपाल आज लोक भवन में आयोजित ‘अक्षर से आत्मबोध तकः त्रिभाषा सूत्र’ पुस्तक के विमोचन समारोह में संबोधित कर रहे थे। इस पुस्तक की रचना प्रो. सत प्रकाश बंसल, इंदर सिंह ठाकुर, प्रो. सुमन शर्मा और डॉ. अशोक शर्मा द्वारा की गई है।

पुस्तक के लेखकों और इसके प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की भाषा उसकी आत्मा, संस्कृति और सामूहिक चेतना को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल भाषा और शिक्षा पर आधारित अकादमिक ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि भारत की संस्कृति को समझने, उसकी विरासत को संरक्षित करने और भविष्य को दिशा देने की एक सार्थक पहल है।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि प्रदेश में त्रिभाषा सूत्र को प्रोत्साहित करने के लिए वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं और इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विद्यालयों में उर्दू और संस्कृत को अतिरिक्त भाषाओं के रूप में पढ़ाया जाता रहा है,
