शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू), शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में न्याय का अर्थ केवल न्यायिक आदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निष्पक्षता, विवेकशीलता और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को समुचित रूप से समझना भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून और न्याय की वास्तविक सार्थकता इसी में निहित है कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी न्याय मिलने की उम्मीद हो, जरूरतमंदों की आवाज सुनी जाए और प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों की सुरक्षा का विश्वास हो। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध करवाने के लिए न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रति प्रतिबद्ध है। न्यायपालिका को लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के तीनों अंगों का मूल उद्देश्य नागरिकों की सेवा करना और उनके अधिकारों तथा न्याय की रक्षा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने विद्यार्थियों को उभरती चुनौतियों के लिए तैयार रहने और विशेष रूप से कृत्रिम मेधा सहित नए क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा और कानूनी पेशे पर भी इसका ठोस असर होगा। विद्यार्थियों को तकनीकी प्रगति को अपनाने का आह्वान करते हुए न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि उन्हें बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, नई तकनीकों को अपनाना चाहिए तथा सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने के निरंतर प्रयास करने चाहिए।
