ग्रेटर नोएडा: दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित अजनारा होम्स सोसाइटी में सोमवार शाम को टावर एम की पैसेंजर लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में रुक गई। लिफ्ट में 5 बच्चे और 3 महिलाओं समेत 14 लोग सवार थे, जो करीब 20 मिनट तक फंसे रहे। पीड़ितों ने इंटरकॉम और सिक्योरिटी अलार्म के जरिए मदद की गुहार लगाई, लेकिन दोनों ही सिस्टम काम नहीं कर पाए। इससे फंसे लोगों में दहशत फैल गई और निवासियों ने सोसाइटी प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल उठाए। इस दौरान बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हुई। एक बच्चा डर से रोने लगा।
लिफ्ट में फंसे एसएस पांडे ने बताया कि शाम को 14 लोग ऊपरी मंजिल से नीचे आ रहे थे। पहली मंजिल पर पहुंचते ही लिफ्ट अचानक झटके के साथ रुक गई और लगभग 10 मिनट तक उसका दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद फंसे लोगों ने दरवाजा पीटकर बाहर मदद की गुहार लगाई। शोर सुनकर आसपास के निवासियों ने मेंटेनेंस और सुरक्षा स्टाफ को सूचित किया, जिसके बाद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बताया जाता है कि कुछ बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और अन्य निवासी ऊपरी फ्लोर से नीचे आ रहे थे, तभी अचानक लिफ्ट झटका खाकर दो मंजिलों के बीच रुक गई। फंसे लोगों ने बार-बार इंटरकॉम और सिक्योरिटी अलार्म का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्हें तुरंत कोई मदद नहीं मिली। लिफ्ट के भीतर से बच्चों के रोने की आवाज सुनाई देने पर आसपास के लोगों ने सुरक्षा गार्ड और मेंटेनेंस स्टाफ को इसकी जानकारी दी। लगभग 20 मिनट बाद पहली मंजिल पर लिफ्ट का दरवाजा खोला गया और अंदर फंसे सभी 14 लोगों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया।
सोसाइटी निवासी दिनकर पांडेय ने आरोप लगाया कि लिफ्ट की नियमित जांच और रखरखाव की कमी से समस्या लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, अजनारा होम्स में लिफ्ट का अटकना अब कोई दुर्लभ घटना नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि लिफ्ट का रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया गया है। उनके अनुसार, अलार्म और इंटरकॉम जैसी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी ठीक से काम नहीं कर रही हैं। अलार्म बजाने के बाद भी बचाव दल को पहुंचने में काफी समय लगा।
निवासियों का कहना है कि बार-बार लिफ्ट फंसने से उनमें चिंता और सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है। सोमवार की घटना में यदि अलार्म और इंटरकॉम सिस्टम समय पर सक्रिय होते, तो फंसे लोगों को इतनी देर तक मदद का इंतजार नहीं करना पड़ता। निवासियों का कहना है कि टावर में तीन लिफ्टें हैं, लेकिन रखरखाव में लापरवाही के चलते दो पहले से बंद थीं। सर्विस लिफ्ट सुबह से चालू नहीं हुई, जबकि दूसरी लिफ्ट दोपहर में खराब हो गई। शाम तक पूरी बिल्डिंग केवल एक लिफ्ट पर निर्भर थी और वही अचानक बंद हो गई।
इस घटना के बाद निवासियों में मेंटेनेंस प्रबंधन के प्रति गुस्सा बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि हर महीने मेंटेनेंस शुल्क समय पर वसूला जाता है, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जाती हैं। पिछले सप्ताह कचरा उठान रोकने और डिलीवरी ब्वॉय, दूध व दवा आपूर्तिकर्ताओं की एंट्री पर पाबंदी लगाने को लेकर भी विवाद सामने आ चुका है। निवासियों ने पुलिस-प्रशासन को शिकायत देने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सभी लिफ्टों की तत्काल मरम्मत और पूरे सोसाइटी की सुरक्षा जांच कराने की मांग की है।
