सेहत: आजकल फिट रहने और वजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले अपनी पसंदीदा चीजें खाना छोड़ने लगते हैं। कई लोग अचानक सख्त डाइट शुरु कर देते हैं लेकिन लंबे समय तक उसे फॉलो करना आसान नहीं होता है। ऐसे में कई एक्सपर्ट्स कुछ आसान तरीके बताते हैं जिन्हें वे फाइबर डिस्प्लेसमेंट नाम दिया है। खास बात यह है कि इसमें आपको अपनी पूरी डाइट बदलने की जरुरत नहीं पड़ती।
रोज खाए जाने वाले खाने में ही कुछ बदलाव करके फाइबर बढ़ाया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हेेल्दी रहने के लिए हर बार नई और अलग हेल्दी डाइट अपनाना जरुरी नहीं है। अगर लोग अपने रोजाना के खाने में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फाइबर वाली चीज शामिल करें तो इससे शरीर को काफी फायदा मिल सकता है।
उनका कहना है कि फाइबर डिस्प्लेसमेंट का मतलब है कि आप वहीं खाना जाए जो पहले से खाते आ रहे हैं लेकिन उसमें फाइबर बढ़ाने वाले छोटे बदलाव कर लें। डॉक्टरों के अनुसार, यदि आप सुबह स्मूदी पीते हैं तो उसमें थोड़ी पालक मिलाई जा सकती है। इससे स्वाद में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन शरीर को एक्स्ट्रा फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिल जाते हैं।
इसी तरह सफेद बींस या मसूर को पकाकर पास्ता, करी या सूप में मिलाया जा सकता है। इससे खाने की टेक्सचर भी बनी रहती है। फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि सिर्फ एक चौथाई सफेद बींस करीबन 4 ग्राम फाइबर बढ़ा सकती है। वहीं दही और उसमें दो चम्मच पिसा हुआ अलसी का बीज मिलाने से 4-6 ग्राम तक एक्स्ट्रा फाइबर मिल सकता है।
इस तरह बिना अलग डाइट अपने दिन के पहले हिस्से में ही शरीर को लगभग 10 ग्राम फाइबर मिल सकता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ज्यादा फाइबर खाना ही काफी नहीं है बल्कि अलग-अलग तरह के फाइबर लेना भी जरुरी है।
पानक, बींस और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया को सपोर्ट करते हैं। इससे आंतों की सेहत बेहतर रहती है। पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसे लेकर कुछ स्टडी भी बताती है कि फाइबर की विविधता और आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद करती है। यही कारण है कि सिर्फ एक तय संख्या में फाइबर लेने पर ध्यान देने की बजाय अलग-अलग स्त्रोत से फाइबर लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, रोजर्मरा के खाने में बदलाव किए जा सकते हैं जैसे स्क्रैंबल एग्स में फ्रोजन मटर मिलाना, खाना में मैश किया हुआ एवाकोडा जोड़ना या सफेद चावल की मात्रा कम करके उसमें ब्राउन राइस मिलना। यह बदलाव देखने में छोटे लग सकते हैं लेकिन लंबे समय में शरीर की सेहत पर अच्छा असर डाल सकते हैं।
