नई दिल्ली: आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है। कभी शाम होते ही लोग साथ बैठकर घंटों बात करते थे, सुख-दुख भी बांटते थे लेकिन अब स्मार्टफोन ने उस जगह को ले लिया है। अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि परिवार के अंदर बातचीत भी कम हो गई है परंतु क्या सच में लोग अब पहले से कम बोल रहे हैं? नई स्टडी में अब चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। स्मार्टफोन के दौर में इंसानों की रोजाना बातचीत तेजी से घट रही है।
वजह जानेंगे तो आप भी हैरान रह जाएंगे। कई सालों तक चले एक बड़े एनालिसिस में सामने आया है कि आज लोग पहले ही तुलना में काफी बोल रहे हैं। रिसर्चर ने 2005 से 2019 के बीच 2200 लोगों की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल थी। नतीजों के अनुसार, रोज बोले जाने वाले शब्दों की औसत संख्या में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट आई है।
पहले जहां लोग करीबन 16,632 शब्द बोलते थे। अब यह घटकर करीबन 11,900 रह गया है। खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को यह पता नहीं था कि उनके शब्दों की गिनती की जा रही है जिससे उनके व्यवहार में बदलाव की संभावना कम रही है।
युवाओं में सबसे ज्यादा असर
यह गिरावट खासतौर पर युवाओं में ज्यादा देखी गई है। 25 साल से कम उम्र के लोग रोजाना औसतन 451 शब्द कम बोल रहे हैं जबकि 25 साल से ऊपर के लोगों में यह कमी करीबन 314 शब्दों की है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसके पीछे हमारी बदलती लाइफस्टाइल है। अब सामने-आमने की बातचीत की जगह मोबाइल और ऐप आधारित बातचीत ने ली है। मैसेज और सोशल मीडिया ने बातचीत का तरीका ही बदल दिया है।
पहले जिन कामों के लिए सीधे बात करते थे जैसे दुकान में मदद लेना। रास्ता पूछना या पड़ोसियों से बात करना। अब वह सब ऑनलाइन हो गया है।
साइकोलॉजिस्ट ने कही ये बात
साइकोलॉजिस्ट में यह कहना है कि इसका असर सिर्फ अकेलेपन तक ही सीमित नहीं होता। आमने-सामने की बातचीत में जो भाव, आवाज का उतार-चढ़ाव और जुड़ाव होता है। वह लिखे गए संदेशों में नहीं मिल पाता। धीरे-धीरे बातचीत की बुनियादी क्षमता, जैसे सामने वाले की बात समझना और यही समय पर प्रतिक्रिया देना भी कमजोर हो सकती है।
एक और जरुरी मां और बच्चों से जुड़ी सामने आई है। ऑब्जर्वेशन आधारित रिसर्च में पाया गया है कि जब मां स्मार्टफोन का इस्तेमाल करती है तो वो अपने छोटे बच्चों से करीबन 16 प्रतिशत कम बात करती है। यानी स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के साथ जरुरी बातचीत को भी कम कर रहा है। बात करना एक एक्टिव प्रक्रिया है। इसमें सामने वाले पर ध्यान देना, तुरंत जवाब देना और अपने हाव-भाव का नियंत्रित करना शामिल है।
महिलाएं ज्यादा बोलती है
डेटा में यह भी सामने आया है कि औसतन महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा बोलती हैं जहां महिलाएं रोज 13,000 से ज्यादा शब्द बोलती है। वहीं पुरुष करीबन 12,000 शब्दों के आस-पास रहते हैं हालांकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह अंतर उल्टा भी हो जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस स्थिति को बदला जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव जैसे बच्चों के साथ ज्यादा बातचीत करना। फोन-कॉल को बढ़ावा देना और समय-समय पर मोबाइल से दूरी बनाना इसमें मदद करता है।
एक्सपर्ट्स ने क्या बताया
स्टडी के अनुसार, यदि व्यक्ति रोज सिर्फ एक नए इंसान से बात करना शुरु कर दे तो इस गिरावट को रोका जा सकता है। यानी समाधान आसान है, बस हमें फिर से बातचीत को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना होगा।
