HomeGovernment Newsभारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

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शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आज शिमला में आयोजित ‘भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी पहचान तथा राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। वर्तमान समय में युवाओं को अपनी संस्कृति, परम्पराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे जिम्मेदार, संवेदनशील और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक बन सकें।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने इस प्रेरणादायी आयोजन के लिए अखिल विश्व गायत्री परिवार को बधाई दी तथा परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की ज्ञान परम्परा, अध्यात्म, विज्ञान, दर्शन और मानव कल्याण की संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। हमारे वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण तथा अन्य महान ग्रन्थ जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति का मूल संदेश ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ है, जो सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा को भी समान महत्त्व दिया जाना चाहिए। ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब वह व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक, संवेदनशील मानव और राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बनने की प्रेरणा दे। राज्यपाल ने कहा कि युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रारम्भ किया गया ‘विचार क्रांति अभियान’ आज भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बना हुआ है। व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण का उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल भारत का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान की भी सबसे बड़ी शक्ति हैं। आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में तकनीकी दक्षता जितनी आवश्यक है, उतने ही आवश्यक चरित्र, अनुशासन, संवेदनशीलता और संस्कार भी हैं। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नैतिकता, राष्ट्र भक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।

राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष प्रदेश के अनेक विद्यालयों के हजारों विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया, जो इस बात का प्रमाण है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत को जानने एवं समझने के प्रति उत्सुक है। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों की भी सराहना की, जो बच्चों में संस्कारों और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब देश की युवा शक्ति ज्ञान, कौशल, संस्कार और राष्ट्रभक्ति से समृद्ध होगी। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने जीवन में सत्य, सेवा, अनुशासन और सदाचार के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अपनी संस्कृति पर गर्व करें, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें तथा समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनें। यही हमारे महान राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला होगी।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, गायत्री परिवार के राज्य संयोजक वी.के. भटनागर, उप संयोजक गिरिजानंद, गायत्री परिवार के सदस्य तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

 

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