कुरुक्षेत्रः LNJP अस्पताल में कंसल्टेंट फिजिशियन के पद पर तैनात डॉक्टर शैलेंद्र कुमार शैली द्वारा नाबालिग से दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद डॉ. शैली अस्पताल छोड़कर फरार हो गया था। जिसके बाद 31 मई को डॉ. शैली के खिलाफ केयूके थाने में पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसकी स्वास्थ्य विभाग ने शैली की सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद 1 जून को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी डॉक्टर ने कहा कि “मुझसे गलती हो गई”। वहीं 15 वर्षीय लड़की से रेप के मामले में राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने लोकनायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (PMO) डॉ. साराह अग्रवाल समेत ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद उन्होंने रेप पीड़िता से भी मुलाकात की। निरीक्षण के दौरान रेणु भाटिया ने एक नर्स से पूछा, “क्या आपकी भी बेटी है?”
नर्स के हां में जवाब देने पर उन्होंने कहा, “क्या आप अपनी बेटी को 15 मिनट के लिए भी किसी कमरे में अकेला छोड़ सकती हैं? फिर इस बच्ची को अकेला कैसे छोड़ दिया गया?” रेप केस में केयूके थाना पुलिस आरोपी डॉ. शैलेंद्र कुमार शैली को गिरफ्तार कर चुकी है। वह LNJP अस्पताल में कंसल्टेंट फिजिशियन के पद पर तैनात था। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। रेणु भाटिया ने पीएमओ से सवाल किया कि लड़की को इतनी देर तक कमरे में अकेला क्यों छोड़ा गया। ओपीडी के अंदर महिला स्टाफ क्यों मौजूद नहीं थी। आरोपी डॉक्टर ने लड़की को 100 रुपए क्यों दिए और उसके माता-पिता के बारे में पूछताछ क्यों की। भाटिया ने कहा, “100 रुपये देने का क्या मतलब था, क्या वह कोई लालच दे रहा था?”
उन्होंने आरोपी डॉक्टर को दोबारा नौकरी पर रखे जाने पर भी सवाल उठाए। भाटिया ने सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह से पूछा कि डॉक्टर की पुनर्नियुक्ति किसके कहने पर हुई, उसकी सिफारिश किसने की और किस आधार पर यह लिखा गया कि अस्पताल को उसकी जरूरत है। इस पर सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि डॉक्टर की नियुक्ति वर्ष 2021-22 में की गई थी। कैथल के किसी पीएमओ ने लिखकर दिया था। भाटिया ने कहा कि लड़की ने महिला वार्ड में भर्ती एक मरीज को बताया था कि डॉक्टर उसे गलत तरीके से छूता है। उस मरीज ने तुरंत स्टाफ को इसकी जानकारी भी दी थी। उन्होंने पूछा कि उस समय वार्ड में कौन-कौन मौजूद था। साथ ही सवाल किया कि जब ओपीडी में तीन नर्सों की ड्यूटी लगी हुई थी, तो फिर किशोरी वहां अकेली कैसे रह गई। इसके 20 मिनट बाद ही डॉक्टर ये यह कांड किया।
निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में रेणु भाटिया ने कहा कि यह मामला बेहद दर्दनाक और शर्मनाक है। अस्पताल कोई पिकनिक स्पॉट नहीं होता, लोग वहां दर्द और परेशानी में इलाज कराने आते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल में भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि किसी भी नाबालिग लड़की की जांच के दौरान महिला नर्स या महिला स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही है। इस मामले में पीएमओ की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। वह इस संबंध में डीजी हेल्थ और एसीएस हेल्थ को लिखित रूप से कार्रवाई की सिफारिश करेंगी।
