बिना पोस्ट मैन के ही पहुंचने वाला पत्र है ‘प्रार्थना’:गौरव कृष्ण गोस्वामी
ऊना /सुशील पंडित: प्रार्थना एक ऐसी संस्तुति है जो अपने इष्ट के प्रति बिना किसी देरी के बिना किसी के सहारे तत्क्षण परमात्मा के पास पहुंच जाती है।कथा व्यास परम श्रद्धेय आचार्य श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी महाराज ने बताया कि संसार की किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिये पोस्टमैन की आवश्यकता पड़ती हैं, लेकिन हृदय से समर्पित की गई प्रार्थना एक ऐसी अभिव्यक्ति है जो बिना किसी पोस्टमैन के ही तत्क्षण गन्तव्य स्थान तक पहुंच जाती है।
कथा में कपिल देव सवांद पर प्रकाश डालते हुए कथा व्यास ने कहा कि देवहूति जी ने पति कर्दम के वन की ओर चले जाने पर पुत्र कपिल के पास आई और प्रार्थना करते हुए बोली कि हे प्रभु हमें संसार के बंधन से मुक्त होने का मार्ग प्रदान करें। मां देवहूति की प्रार्थना को भगवान कपिल ने तत्क्षण स्वीकार किया और ऐसा उपदेश प्रदान किया कि देवहूति संसार सागर से मुक्त होकर नदी के रूप में परणित होकर मुक्त हो गई। आगे सती चरित्र की विस्तार से श्रोताओं को श्रवण कराया जिससे कथा प्रांगण का वातावरण शिव मय हो गया। परम भक्त ध्रुव जी के चरित्र पर व्याख्यान देते हुए उन्होने कहा कि मात्र पांच वर्ष की अवस्था में ध्रुव को दर्शन देकर अखण्ड राज्य प्रदान करते हुए उनके लिये ध्रुव लोक का निर्माण कर दिया।
कथा व्यास ने बताया कि प्रभु के दर्शन के लिये व्यक्ति को सत्संग सेवा सुमिरन में हमेशा लीन रहना चाहिये और अपने को मानव बनाने का प्रयत्न करो तुम यदि इसमें सफल हो गये,तो तुम्हे इस कार्य में सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होगी। कुसंगति की अपेक्षा अकेले रहना सबसे उत्तम है।