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मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर निर्णय का दिया आश्वासन

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शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राथमिक शिक्षकों को आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर उचित निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस व्यवस्था की सहानुभूतिपूर्वक समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि इसमें सुधार की आवश्यकता है या इसे पूरी तरह वापस लिया जाए।

आज शिमला के चौड़ा मैदान में आयोजित प्राथमिक शिक्षक संघ की आम सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और शिक्षक संघ के बीच होने वाली आगामी बैठक में इस विषय पर निष्पक्ष एवं सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्राथमिक शिक्षकों के विरुद्ध की गई निलंबन की कार्रवाइयों, विभागीय जांचों तथा दर्ज एफआईआर को वापस लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्य अध्यापकों, केंद्र मुख्य अध्यापकों तथा खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के अधिकारों की शक्तियों में कमी नहीं की जाएगी। साथ ही, प्राथमिक विद्यालयों में खेल गतिविधियों को भी पुनः शुरू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जेबीटी शिक्षकों को टीजीटी पदों पर पदोन्नति प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षक संघ की मांगों पर शनिवार को सचिवालय में संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में विस्तार से चर्चा की गई है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनके हितों की पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार लागू कर रही है और शिक्षकों के सहयोग से प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों को राज्य के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा पहले ही शुरू की जा चुकी है। उन्होंने इस दिशा में प्राथमिक शिक्षकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि सीबीएसई विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति लगभग पूरी हो चुकी है और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में 1.36 लाख कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और कल्याण को ध्यान में रखकर लिया गया। उन्होंने कहा, मैं स्वयं एक सरकारी कर्मचारी का बेटा हूं। हमने ओपीएस इसलिए बहाल की क्योंकि नई पेंशन योजना के तहत कई कर्मचारियों को मात्र 3,000 रुपये तक पेंशन मिल रही थी, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रभावित हो रहा था। ओपीएस लागू होने के बाद अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब लगभग 30,000 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और संसाधनों की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने राज्य के हितों की रक्षा नहीं की। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हुए आर्थिक नुकसान तथा लगभग 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां वर्तमान सरकार के लिए छोड़ दी गईं। उन्होंने प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

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