शिमला: मत्स्य संरक्षण एवं प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष लागू होने वाले मछली पकड़ने के प्रतिबंध (क्लोज़ सीजन) के दौरान मछुआरों को होने वाली आर्थिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़े पात्र मछुआरों को वित्तीय सहायता एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
हर वर्ष मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान आजीविका के लिए मुख्य रूप से मत्स्य पालन पर निर्भर बड़ी संख्या में मछुआरों की आय अस्थायी रूप से बंद हो जाती है, जिससे उनके परिवार आर्थिक संकट का सामना करते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने प्रतिबंध अवधि के दौरान प्रत्येक पात्र लाभार्थी को प्रतिवर्ष 3,500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य गैर-मत्स्यन अवधि में समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित बनाना है।
यह योजना पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़े सक्रिय एवं पात्र मछुआरों पर लागू होगी, जिनके पास वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस होगा। योजना का उद्देश्य प्रतिबंध अवधि के दौरान आर्थिक राहत प्रदान करना, मत्स्य संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना तथा मत्स्य क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले वास्तविक मछुआरों को सहयोग प्रदान करना है।
पात्र मछुआरों को निर्धारित प्रपत्र में संबंधित मत्स्य सहकारी समिति के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस, आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर की प्रति, वैध एनएफडीपी पंजीकरण संख्या तथा सहकारी समिति की सदस्यता प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने आवश्यक हैं। प्राप्त आवेदनों की जांच एवं सत्यापन संबंधित मत्स्य सहकारी समितियों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसके उपरांत जिला स्तर पर उपनिदेशक मत्स्य अथवा सहायक निदेशक मत्स्य द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। स्वीकृत वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, लाभार्थियों का रिकॉर्ड तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मत्स्य निदेशालय द्वारा नियमित निगरानी एवं सत्यापन किया जाएगा, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र मछुआरों तक पहुंचे।
इस योजना से प्रतिवर्ष गोबिंद सागर, पौंग बांध, कोल बांध, चमेरा तथा रंजीत सागर जलाशयों से जुड़े लगभग 3,700 मछुआरें परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है। योजना के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 1.20 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को पर्याप्त सहयोग एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मछुआरें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मत्स्य क्षेत्र में उनका बहुमूल्य योगदान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ जलाशयों पर निर्भर मत्स्यजीवी परिवारों को मछली पकड़ने की प्रतिबंध अवधि के दौरान आवश्यक वित्तीय संबल प्रदान करेगी। राज्य सरकार मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने, मछुआरों की आय बढ़ाने तथा जलीय संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा विकास का लाभ राज्य के दूरदराज़ एवं कमजोर वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम है।

