इंदौरः गोराकुंड चौराहे के पास स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। बताया जा रहा है कि नई पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान सड़क के नीचे से पानी फूटने के बाद यह स्थिति बनी। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस सड़क के निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च किए गए, उसके धंसने से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सड़क धंसने की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है। जिसमें साफ दिख रहा है कि सड़क पर सामान्य आवाजाही चल रही थी, तभी अचानक नीचे से पानी का तेज बहाव आया और सड़क के परखच्चे उड़ गए। जिस वक्त सड़क फटी, वहां से कार, ऑटो और बाइक सवार गुजर रहे थे। गनीमत रही कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। खौफ के कारण लोग गाड़ियां छोड़कर भागने लगे। पानी के जबरदस्त प्रेशर से डामर और पेवर ब्लॉक उखड़ गए। सड़क के बीचोबीच बड़ा गड्ढा बन गया।
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— EncounterIndia (@encounterindia) August 18, 2026
जानकारी के अनुसार, गोराकुंड क्षेत्र में पानी की नई लाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है। इंजीनियर कनेक्शन जोड़ने के बाद पाइप लाइन की टेस्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान पानी के दबाव से सड़क का हिस्सा टूट गया और पानी सड़क पर फैल गया। यह सड़क स्मार्ट सिटी के एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के तहत विकसित की गई थी। एमजी रोड और आसपास के क्षेत्रों में सड़क सहित कई सुविधाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़क इतनी कमजोर कैसे हो गई, इसकी जांच होनी चाहिए। इस घटना ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बिछाई गई पानी की लाइन की टाइमिंग और सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल सड़क धंसने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। विशेषज्ञों की टीम यह जांच कर सकती है कि सड़क के नीचे की मिट्टी, ड्रेनेज व्यवस्था, पानी की पाइपलाइन और सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री में कहीं कोई कमी तो नहीं थी। यदि निर्माण में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ सकती है। गोराकुंड में हुई इस घटना ने स्मार्ट सिटी के तहत किए गए करोड़ों रुपए के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। सड़क को दोबारा दुरुस्त करने के साथ इसकी तकनीकी जांच कब तक पूरी होती है।

