नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की दूसरी मीटिंग में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। शुक्रवार को इस फैसले का ऐलान करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है। सप्लाई चेन में लंबे समय तक व्यवधान और ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का असर विकास दर और महंगाई दर दोनों पर पड़ सकता है।
वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते RBI ने GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष-27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बावजूद मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। कमेटी स्थिति पर नजर रखते हुए डेटा के आधार पर आगे कदम उठाएगी।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं। पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।
अच्छी बात यह है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर है और जीएसटी रेशनलाइजेशन व स्थिर रोजगार के चलते शहरी क्षेत्रों में कंजम्पशन (खपत) को सहारा मिल रहा है।
