चंडीगढ़, 10 मई 2026: पंजाब ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में अपनी जगह मजबूत की है। NITI Aayog की Education Quality Report 2026 में पंजाब को स्कूल शिक्षा के कई महत्वपूर्ण मानकों पर केरल से आगे बताया गया है। लंबे समय से देश में शिक्षा का मॉडल माने जाने वाले केरल को पीछे छोड़ना पंजाब के सरकारी स्कूलों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
पंजाब के शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने इस उपलब्धि को राज्य के शिक्षा क्षेत्र में “नए दौर की शुरुआत” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों और सरकार की लगातार मेहनत का नतीजा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के कक्षा 3 के छात्रों ने भाषा विषय में 82 प्रतिशत और गणित में 78 प्रतिशत दक्षता हासिल की है। वहीं केरल का प्रदर्शन क्रमशः 75 प्रतिशत और 70 प्रतिशत रहा। इसके अलावा कक्षा 9 गणित में पंजाब ने 52 प्रतिशत स्कोर हासिल किया, जबकि केरल 45 प्रतिशत पर रहा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये परिणाम कोरोना महामारी के बाद शुरू किए गए सुधार कार्यक्रमों का असर हैं। उन्होंने बताया कि Mission Samarth और Schools of Eminence जैसी योजनाओं ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और सीखने के माहौल में बड़ा बदलाव
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पंजाब के सरकारी स्कूलों का ढांचा तेजी से बदला है। उन्होंने बताया कि NITI Aayog रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में अब बिजली उपलब्ध है, जबकि 99 प्रतिशत स्कूलों में कार्यशील कंप्यूटर मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे डिजिटल और इंटरएक्टिव शिक्षा को बढ़ावा मिला है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को भी आधुनिक शिक्षा सुविधाएं मिल रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पंजाब में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में भारी कमी आई है। अब 90 प्रतिशत से अधिक छात्र कक्षा 10 के बाद कक्षा 11 में प्रवेश ले रहे हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, इससे यह साफ होता है कि सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में छात्र-शिक्षक अनुपात भी सुधरकर 22:1 हो गया है, जिसे आदर्श स्थिति माना जाता है। इससे शिक्षकों को छात्रों पर व्यक्तिगत रूप से अधिक ध्यान देने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में पंजाब की इस बात के लिए भी सराहना की गई है कि राज्य ने ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच का अंतर कम करने में सफलता हासिल की है। अब गांवों के छात्रों को भी वे सुविधाएं मिल रही हैं, जो पहले केवल शहरों के निजी स्कूलों तक सीमित थीं।
उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों की शिक्षा और समान अवसरों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था अधिक समावेशी बनी है।
फिनलैंड-सिंगापुर ट्रेनिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता से बढ़ा भरोसा
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षक प्रशिक्षण योजनाओं का असर अब स्कूलों में दिखाई देने लगा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों की ट्रेनिंग दी गई।
उनके अनुसार, इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से शिक्षकों को बच्चों के साथ इंटरएक्टिव तरीके से पढ़ाने, रटने की बजाय समझ विकसित करने और आधुनिक क्लासरूम तकनीकों का उपयोग करने में मदद मिली।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 13,000 शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती भी की है। इसके अलावा लगभग 3 लाख छात्रों के लिए English Edge Programme शुरू किया गया, ताकि उनकी अंग्रेजी और संचार क्षमता बेहतर हो सके।
उन्होंने कहा कि राज्य में 118 Schools of Eminence स्थापित किए गए हैं, जहां छात्रों को आधुनिक शिक्षा, करियर मार्गदर्शन और स्किल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
NITI Aayog रिपोर्ट में प्रतियोगी परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के छात्रों की बढ़ती सफलता का भी उल्लेख किया गया। मंत्री ने बताया कि अब तक 786 सरकारी स्कूल छात्रों ने JEE Main और 1,284 छात्रों ने NEET परीक्षा पास की है।
उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि सरकारी स्कूलों के छात्र अब केवल निजी स्कूलों की बराबरी ही नहीं कर रहे, बल्कि कई क्षेत्रों में आगे निकल रहे हैं।
अपने संबोधन के अंत में हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों से शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि पंजाब के शिक्षकों और छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी स्कूल भी देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।
