नई दिल्ली/पंजाब, 5 मई 2026: पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann ने मंगलवार को राज्यसभा सांसदों के दल बदल के मुद्दे को लेकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाया। उन्होंने पंजाब के विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि दल बदल करने वाले सांसदों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ गंभीर छेड़छाड़ करार देते हुए कहा कि यह जनता के जनादेश के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों ने पार्टी बदलकर अपनी निष्ठा बदली है, उन्होंने नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों दोनों का उल्लंघन किया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पंजाब में केवल दो विधायकों वाली पार्टी के पास राज्यसभा में सात सांसद कैसे हो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए कहा कि यह स्थिति पूरी तरह से जनादेश के विपरीत है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सांसदों को पार्टी बदलनी ही थी तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए था और फिर जनता के बीच जाकर नया जनादेश लेना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सत्ता के लालच में लिया गया ऐसा फैसला जनता के विश्वास को तोड़ने जैसा है।
‘ऑपरेशन लोटस’ और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि देश में राजनीतिक दलों को तोड़ने और विपक्षी नेताओं को कमजोर करने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे राज्य में ऐसी कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी, क्योंकि यहां की जनता राजनीतिक धोखे को बर्दाश्त नहीं करती।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर नेताओं को डराने या उन्हें अपनी ओर करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम लोकतंत्र की हत्या के समान है और इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और पार्टी इस मुद्दे पर आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।
उन्होंने राज्यसभा सांसदों को “चुने हुए नहीं, बल्कि चुने गए” बताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने इन नेताओं को चुनौती दी कि वे अपने पद से इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाएं और चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करें।
संविधान में बदलाव और ‘रिकॉल’ की मांग, BJP पर पंजाब विरोधी रुख का आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे मुद्दे के समाधान के लिए संवैधानिक सुधार की भी मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान में ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे जनता अपने प्रतिनिधियों को वापस बुला सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के ‘रिकॉल’ सिस्टम से ही ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के लोग ऐसे विश्वासघात को कभी माफ नहीं करेंगे और आने वाले समय में इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि जो नेता जनता के भरोसे से जीतकर संसद पहुंचे हैं, उनका इस तरह दल बदलना जनता का अपमान है।
मुख्यमंत्री ने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी पंजाब के हितों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पंजाब के कई अधिकारों और संसाधनों पर रोक लगाने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि पंजाब को उसके हक का हिस्सा नहीं दिया जा रहा है और विकास कार्यों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।
उन्होंने BJP को चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब की जनता समझदार है और वह इस तरह की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के लोग हमेशा अपने अधिकारों के लिए खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
अंत में उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता सर्वोपरि है और कोई भी राजनीतिक ताकत उनके अधिकारों को कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता आने वाले समय में सही फैसला लेगी और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगी।
