अमृतसरः शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी (एसजीपीसी) की आंतरिक कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में एसजीपीसी सदस्य और आंतरिक समिति के सदस्य गुरप्रीत सिंह झज्जर ने जानकारी दी कि बैठक के दौरान संगठन के सामान्य मुद्दों के साथ-साथ स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और गुरुद्वारों के प्रबंधन पर विचार किया गया। उन्होंने बताया कि 10 लाख रुपये से अधिक के सभी प्रोजेक्ट और खर्चे आंतरिक समिति के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं और इन पर निर्णय लिए जाते हैं।
बैठक के दौरान भाई बलवंत सिंह राजोआना के मामले पर भी गंभीर विचार हुए। झज्जर ने कहा कि राजोआना को लगभग 32 साल से जेल में रखा गया है और पिछले 19 सालों से फांसी की सजा के तहत है। उन्होंने कहा कि इस मामले में 2012 में अकाल तख्त साहिब के आदेशों पर एसजीपीसी ने अपील की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि आंतरिक समिति ने एक बार फिर अकाल तख्त साहिब को अपील की है कि वह इस मामले में फैसला सुनाने की या अनदेखी करने की अनुमति मांगे या नहीं। उन्होंने कहा कि राजोआना खुद भी कई बार अपील वापस लेने की बात कर चुके हैं।
इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा डैमों पर अधिकारों में दखलअंदाजी और बीबीएमबी में पंजाब के अधिकारियों की नियुक्ति खत्म करने के मामले पर भी कठोर प्रतिक्रिया दी गई। समिति ने इस मामले में निंदा प्रस्ताव पास किया और कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के हकों पर डाका डाल रही है। बेअदबी मामलों से संबंधित बिल में की गई संशोधन पर भी एसजीपीसी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। झज्जर ने कहा कि सरकार द्वारा 45 दिनों में गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों का पूरा रिकॉर्ड वेबसाइट पर उपलब्ध कराने के आदेश धार्मिक संस्था के अधिकार में हस्तक्षेप हैं। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के पास पहले ही पूरे रिकॉर्ड मौजूद हैं और इस तरह के आदेश बेअदबी के मुद्दे का कोई समाधान नहीं निकालेंगे।
