लुधियानाः हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स में पिछले 6 महीनों से चल रही जलभराव और सीवरेज की समस्या को लेकर डेयरी संचालकों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। नगर निगम और प्रशासन की अनदेखी से परेशान डेयरी संचालकों ने मंगलवार को डिप्टी कमिशनर और प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। डेयरी मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर बुधवार (20 मई 2026) की दोपहर तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे अपनी गायों और भैंसों के साथ हंबड़ा रोड पर उतरकर चक्का जाम करेंगे।
डेयरी संचालकों का कहना है कि कॉम्प्लेक्स में जलभराव के कारण हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि हर डेयरी में गंदा पानी जमा है। संचालकों के मुताबिक हमारी तीन-चार लाख रुपये की कीमती गाएं और भैंसें लगातार गंदे पानी में खड़ी रहने को मजबूर हैं जिससे उनके बीमार होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। संचालकों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन पिछले 6 महीनों से पानी की निकासी पूरी तरह ठप पड़ गई है। आए दिन संचालक खुद ही अस्थायी जुगाड़ करके पानी निकालने की कोशिश करते हैं,जो नाकाफी साबित हो रहा है।
जलभराव का मुख्य कारण ईटीपी प्लांट को बताया जा रहा है।अधिकारियों का तर्क है कि प्लांट की क्षमता कम है जिस पर डेयरी संचालकों ने पलटवार करते हुए कहा कि हमने तो छोटा प्लांट लगाने के लिए नहीं कहा था। संचालकों ने नगर निगम और प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि जानबूझकर पानी की निकासी रोकी गई है, जिससे सारा गंदा पानी डेयरियों और गलियों में वापस भर रहा है। प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए डेयरी मालिकों ने याद दिलाया कि पिछले दिनों ताजपुर रोड के डेयरी संचालकों ने भी जलभराव से तंग आकर नगर निगम के जोन-डी दफ्तर में गोबर फेंककर भारी विरोध दर्ज कराया था। इसके बावजूद प्रशासन नींद से नहीं जागा और समस्या जस की तस बनी हुई है।
संचालकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्होंने कई बार प्रशासन के आगे हाथ जोड़े और मिन्नतें कीं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब उन्होंने ऐलान किया है कि अगर 20 मई की दोपहर तक उनकी समस्या का स्थायी हल नहीं निकाला गया तो हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स और हंबड़ा रोड को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। अगर चक्का जाम के बाद भी प्रशासन ने सुध नहीं ली तो वे अपने सभी पशुओं को लेकर शहर के अंदर घुस जाएंगे और सड़कों पर उतरेंगे। संचालकों ने साफ किया है कि इसके बाद बिगड़ने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और नगर निगम की होगी।
