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Punjab News: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुखपाल खैरा की याचिका खारिज की, पंचायत भूमि मामले में लगाया ₹6 लाख का जुर्माना

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चंडीगढ़, 21 मई: आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस विधायक Sukhpal Singh Khaira को ग्राम पंचायत भूमि अतिक्रमण मामले में बड़ा राजनीतिक और कानूनी झटका लगा है। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है और साथ ही कांग्रेस विधायक पर ₹6 लाख का जुर्माना भी लगाया है।

चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बलतेज पन्नू ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले ने सुखपाल सिंह खैरा के उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें वह खुद को राजनीतिक बदले की कार्रवाई का शिकार बताते रहे हैं। पन्नू ने आरोप लगाया कि मामला ग्राम पंचायत रामगढ़ की सार्वजनिक सड़क और रास्ते पर अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ था।

AAP नेता के अनुसार स्थानीय लोगों की ओर से शिकायत दी गई थी कि सुखपाल सिंह खैरा और कुलबीर सिंह खैरा ने सार्वजनिक रास्ते पर कथित रूप से अवैध गेट लगाकर गांव के लोगों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न की। उन्होंने कहा कि यह मामला बाद में प्रशासन और कोर्ट तक पहुंचा।

बलतेज पन्नू ने कहा कि कोर्ट के सामने ग्राम पंचायत रामगढ़ की Measurement Book, जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट, SVAMITVA रिकॉर्ड और सैटेलाइट इमेजरी जैसे दस्तावेज पेश किए गए। उनके मुताबिक इन रिकॉर्ड्स से यह स्पष्ट हुआ कि विवादित जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाई गई पंचायत सड़क और रास्ते का हिस्सा थी।

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि रास्ते पर लगाया गया गेट सार्वजनिक मार्ग में कथित अवैध रुकावट और अतिक्रमण था। पन्नू ने दावा किया कि इस कारण एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों जैसी आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती थी।

AAP नेता ने आरोप लगाया कि जब सरकारी अधिकारी और प्रशासनिक टीम कथित अवैध कब्जा हटाने पहुंची तो सुखपाल सिंह खैरा ने इसका विरोध किया और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कार्रवाई में बाधाएं उत्पन्न कीं। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला इस पूरे मामले पर स्पष्ट संदेश देता है।

बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखपाल सिंह खैरा ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका पूरी तरह खारिज कर दी और उन पर ₹6 लाख की लागत भी लगाई।

उन्होंने कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय ने कथित तौर पर माना कि याचिका को “बहुत चालाकी और योजनाबद्ध तरीके” से तैयार किया गया था ताकि यह दिखाया जा सके कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन हुआ है, जबकि असल विवाद सार्वजनिक संपत्ति पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा था।

बलतेज पन्नू ने कहा कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अवमानना अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल राजनीतिक या प्रशासनिक विवादों को निपटाने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि जुर्माने की राशि उन सभी पक्षों में बराबर बांटी जाए, जिनके खिलाफ सुखपाल सिंह खैरा ने कार्यवाही शुरू की थी।

AAP नेता ने कहा कि यदि जुर्माने की राशि जमा नहीं करवाई जाती, तो इसे भूमि राजस्व बकाया के रूप में वसूला जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुखपाल सिंह खैरा अक्सर बिना तथ्यों के राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाते रहे हैं और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।

बलतेज पन्नू ने दावा किया कि हाई कोर्ट के फैसले ने इस मामले में सुखपाल सिंह खैरा की स्थिति को पूरी तरह उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है और अब इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है।

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