नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की कोशिशें जारी हैं। अब कतर ने अपने मध्यस्थों की एक टीम तेहरान भेजी है ताकि अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते का रास्ता निकाला जा सके। दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और ग्लोबल ऑयल मार्केट दोनों पर भारी असर पड़ा है।
बताया जा रहा है कि कतर एक ऐसे समझौते पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत होर्मुज स्ट्रेट को खोला जाएगा और बदले में अमेरिका कुछ प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को लेकर बातचीत आगे बढ़ा सकता है। प्रस्तावित समझौते में 30 दिनों की बातचीत का ढांचा शामिल है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे चर्चा हो सकती है।
अब तक अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल बातचीत में मुख्य भूमिका पाकिस्तान और ओमान निभा रहे थे लेकिन अब कतर की एंट्री को बड़े कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसीम मुनीर भी तेहरान में ही है जबकि पाकिस्तानी पीएम शरीफ शनिवार को चीन रवाना हो सकते हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान किसी संभावित डील में चीन को गारंटर बनाने की कोशिश कर रहा है। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी हालात में ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने की अनुमति नहीं देगा। ईरान में पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी नाम का नया ढांचा बनाया है जिसके जरिए वह जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करने और शुल्क वसूलने की तैयारी में है।
ईरान की इस योजना का खाड़ी देशों ने भी विरोध शुरु कर दिया है। सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब, अमीरात, बहरीन, कुवैत और कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण को संयुक्त पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है।
ईरान पर हमले की योजना में ट्रंप
अमेरिकी मीडिया में यह दावा किया गया है कि वॉशिंगटन नए सैन्य हमलों पर विचार कर रहा है हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपने निजी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और व्हाइट हाउस में लगातार बैठकों का दौर जारी है। ईरान फिलहाल युद्धविराम प्रतिबंधों में राहत और भविष्य में हमले न करने की गारंटी चाहता है। वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी चाहते हैं कि तेहरान पहले होर्मुज स्ट्रेट खोले और अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करे।
तेल सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित होने से खाड़ी देशों में बैचेनी बढ़ गई है। कई अरब देशों की आय तेल निर्यात पर निर्भर है और लंबे समय तक स्ट्रेट बंद रहने से उनकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
