जिसमें जरूरतमंद लोगों को शवदाह के लिए निशुल्क लकडिय़ां मुहैया करवाई जाएंगी। समिति के सदस्यों ने कड़े शब्दों में कहा कि घाट को कूड़ेदान नहीं बनने दिया जाएगा। इसके अलावा नशेड़ी तथा अवैध कार्यों को पूर्ण रूप से वर्जित किया जाएगा। शवदाह तथा मंदिर के लिए अलग-अलग रास्तों को निर्माण किया जाएगा। इस स्थल में हर साल बैसाखी के अलावा अमावस्या तथा संक्रांति को आसपास के गांवों के लोगों का हुजूम बड़ी संख्या में जुटता है। इसके अलावा हरिद्वार में होने वाली गंगा आरती की तर्ज पर यहां घाट पर सतलुज आरती की व्यवस्था की जाएगी। यहां फैलाई गई नकारात्मकता को समाप्त किया जाएगा। इस घाट की पुरातन और ऐतिहासिकता को वापस लाने का प्रयास होगा। इसके अलावा पंचघाटड़ा घाट को धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने कहा कि इस स्थल की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए इसे नशे का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। समिति के सदस्यों ने घाट को विस्तारित पर अपनी सहमति जताई। एक अहम फैसले में घाट में एक पंडित की नियुक्ति की जाएगी। जो कि जरूरतमंदों के लिए समिति की ओर से अपनी सेवाएं निशुल्क देंगे। पंकज सहोड़ ने कहा कि पंचघाटड़ा घाट को शवदाह स्थल के साथ-साथ धार्मिक और पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
यहां बने कमरों को हटाकर एक बड़ा हाल तैयार किया जाएगा। यहां की धार्मिक, पवित्रता और स्वच्छता को कायम रखने के लिए समिति वचनबद्ध है। इस स्थल पर किसी भी प्रकार के अवैध और नशे से जुड़े कार्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल्द ही इस स्थल का नया और आकर्षक रूप लोगों को देखने को मिलेगा। आने वाले समय में यहां लोग एक धार्मिक पर्यटक नगरी को निहारने के लिए आया करेंगे। इस मौके पर समिति के कोषाध्यक्ष जय गोपाल शर्मा, वरिष्ठ सलाहकार विनोद कुमार, सलाहकार मूलराज सोनी, जसपाल, विनोद कुमार, अभिषेक शर्मा, सुनील मेहरा, अरुण, अज्ञापाल, अमन बाली, विनोद भोलू, सज्जन सिंह, शीलू, हनी मेहरा, राघवन, काला बजाज उपस्थित रहे।
