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हाशिये पर जी रहे मनुष्य की पक्षधर कविताओं का संग्रह है “आत्महत्या से बचे हुए लोग”-सुरेश सेठ

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ऊना/सुशील पंडित: अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की हिमाचल इकाई द्वारा गत दिन 25 अप्रैल को जिला कल्याण भवन के सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में हिंदी के चर्चित कवि कुलदीप शर्मा के नये काव्य संग्रह “आत्महत्या से बचे हुए लोग” का लोकार्पण किया गया।
अलका चावला ने मंच संचालन करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और सबका संक्षिप्त परिचय भी दिया। डॉ धर्मपाल साहिल ने कुलदीप शर्मा के इस नये काव्य संग्रह पर एक शोध पत्र पढ़ा और डॉ प्रोमिला अरोड़ा, कुलदीप सिंह दीप, सुरजीत जज, देवेन्द्र धर. डॉ सत्यपाल सहगल प्रोफ सुरेश सेठ ने परिचर्चा में प्रमुखता से भाग लिया।  प्रोफ सुरेश सेठ ने कहा की कुलदीप शर्मा की कविता-पुस्तक समाज में हाशिये पर खड़े लोगों के पक्ष में की गयी जोरदार पैरवी है, डॉ सत्यपाल सहगल ने कहा कि कुलदीप शर्मा की कविता इस बात का सबूत है, कि इस कठिन समय में प्रतिरोध के स्वर समाज के लिए कितने जरूरी हैं।
स. पृथीपाल सिंह ने कहा कि कुलदीप शर्मा हिंदी कविता में एक अनिवार्य रिक्ति की पूर्ति करते हैं और इस हवाले से बधाई के पात्र हैं। डॉ धर्मपाल साहिल ने कहा कि कुलदीप शर्मा अपनी कविताओं में कथन की विलक्षणता के कारण अलग थलग नजर आते हैं।  कुलदीप सिंह दीप ने विमोचित पुस्तक की कविताओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि कुलदीप शर्मा की भाषा अत्यंत सरल, लगभग बोलचाल की भाषा है किन्तु इनकी बिम्ब संरचना और कथ्य इतना अद्भुत है, कि इनमे पाश और धूमिल से आगे के स्वर सुनाई देते है।
डॉ सुरजीत जज ने कहा कि कुलदीप शर्मा की कविताएँ हमे उन घटनाओं के सामने ला खड़ा करती हैं।  जो अक्सर हमारी दृष्टि से छूट जाती है। देवेन्द्र धर ने कहा कि यह कविताएँ पाठक को झकझोरती हैं, उसे असहज बनाती हैं और उसे अपने समय की विडम्बनाओं और त्रासदियों का भागीदार भी बनाती हैं। भोजनोपरांत दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
जिसमे चालीस के लगभग कवियों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं, चंडीगढ़ के मशहूर शायर अशोक नादिर, चमन शर्मा चमन, सुरजीत जज, कमलनयन शर्मा, सुभाष गुप्ता शफीक, तलविंदर सिंह, संतोख सिंह, बलविंदर भट्टी व ज़ाहिद अबरोल ने बेहतरीन ग़ज़लें सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। सत्यपाल सहगल, सुरेश सेठ, कुलदीप सिंह दीप, रतन चंद निर्झर, रणजोध सिंह, अलका चावला, देवेन्द्र धर, प्रोमिला अरोड़ा और कुलदीप शर्मा  ने अपनी मुक्तछंद कविताओं से मौहौल को वैचारिकता और भावात्मकता का पुट दे दिया।

इस अवसर पर देश भर से जुटे लगभग चालीस साहित्यकार, कवि और बुद्धिजीवियों में मुख्य रूप से पंजाब से पधारे शिरोमणि साहित्यकार प्रो. सुरेश सेठ, चंडीगढ़ से प्रख्यात कवि आलोचक प्रो. सत्यपाल सहगल, हिमाचल के लोकप्रिय कवि, उपन्यासकार ऊना नगर निगम के प्रशसनिक अधिकारी स. पृथीपाल सिंह (हि.प्र.से). डॉ प्रोमिला अरोड़ा, डॉ धर्मपाल साहिल, कवि लेखक सुरजीत जज, प्रसिद्द कवि रंगकर्मी कुलदीप सिंह दीप, शिमला से देविन्द्र धर, बिलासपुर से यायावर कवि रतन चंद निर्झर, प्रो रणजोध सिंह, चंडीगढ़ से बलविंदर सिंह भट्टी, गुरजोत सिंह, तलविंदर सिंह, होशियारौर से सुभाष गुप्ता शफीक, कमल नयन शर्मा, बिलासपुर से हिमचल प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष लेख राम, चंडीगढ़ से ख्यातिप्राप्त शायर व् अधिवक्ता चमन शर्मा चमन, शायर अशोक नादिर, चौहान इस समारोह में शामिल हुए।

 

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