चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरूवार को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा छोटा प्रदेश है। देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1.3 प्रतिशत और कुल आबादी का लगभग 2 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा में है। फिर भी सितंबर 2026 में हरियाणा से 10 हजार 97 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी एकत्र हुआ। यह सभी राज्यों में पांचवां सबसे अधिक है और पूरे देश के घरेलू जीएसटी का 7 प्रतिशत से अधिक है।

इस दौरान उन्होंने तीन प्रस्ताव भी रखे। उन्होंने पहला प्रस्ताव रखते हुए कहा कि जीएसटी के शुरुआती वर्षों, यानी वित्त वर्ष 2017–18 से 2019–20 से जुड़े आदेशों के विरुद्ध अपील दायर करने की समय–सीमा में एक और, एकमुश्त छूट देने का है। नवंबर 2023 में सीमित अवधि के लिए अपील दायर करने का एक अवसर दिया गया था। हरियाणा में ऐसे 646 मामले हैं, जिनमें अपीलें केवल देरी के कारण खारिज हुई हैं। इन मामलों में 567 करोड़ 43 लाख रुपये की मांग है। इन आंकड़ों के पीछे ऐसे करदाता हैं, जो चाहते हैं कि उनके मामले की सुनवाई गुण–दोष के आधार पर हो।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2025–26 में हरियाणा का राज्य जीएसटी राजस्व, आईजीएसटी सेटलमेंट में राज्य के हिस्से को मिलाकर, 39 हजार 743 करोड़ रुपये से बढ़कर 48 हजार 289 करोड़ रुपये हो गया। 22 प्रतिशत की यह वृद्धि सभी राज्यों में सबसे अधिक रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष के पहले छह महीनों में राज्य जीएसटी राजस्व 29 हजार 108 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसे पूरा करने के लिए हरियाणा अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार राजस्व बढ़ाने और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर लगातार काम कर रहा है। जीएसटी देश में सहकारी संघवाद का मजबूत उदाहरण है। जो भी सुधार इसे ईमानदार करदाता के लिए सरल बनाता है और राजस्व को सुरक्षित करता है, वह देश को ‘विकसित भारत’ के संकल्प के और करीब ले जाता है।
