चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) प्रदान करने और उसके उपयोग से संबंधित 16 नवंबर, 2021 की नीति में संशोधनों को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य टीडीआर प्रमाण-पत्रों के मूल्यांकन, हस्तांतरण और उपयोग से जुड़े मुद्दों का समाधान करना तथा प्रदेशभर में बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन को सुगम बनाना है।
मौजूदा टीडीआर पाॅलिसी के तहत उन भू-स्वामियों को टीडीआर प्रमाण-पत्र दिए जाने का प्रावधान है, जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक अपनी भूमि सरकार को देते हैं। भू-स्वामी ऐसे प्रमाणपत्रों को उसी विकास योजना के भीतर डेवलपर्स या अन्य उपयोगकर्ताओं को बेचकर अपने विकास अधिकारों का मुद्रीकरण (मोनीटाइज) करके धनराशि प्राप्त कर सकते हैं।
संशोधित नीति के तहत, उस काल्पनिक भूमि (नोशनल लैंड) की गणना के फार्मूला को संशोधित किया जाएगा, जिसके लिए टीडीआर प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यह गणना आवेदन के कैलेंडर वर्ष की 1 जनवरी को लागू दर से जुड़े मौजूदा प्रावधान के बजाय, आवेदन जमा करने की तिथि को दी गई भूमि पर लागू भारित औसत कलेक्टर रेट पर आधारित होगी।
संशोधनों में यह भी प्रावधान है कि संशोधित फार्मूला उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रदान करने के लिए लंबित उन सभी आवेदनों पर लागू होगा, जहाँ टीडीआर प्रमाण-पत्र के उपयोग के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति सहित कोई भी अनुमति नहीं दी गई है।
