शिवमोग्गा: कर्नाटक के शिवमोग्गा में दशहरा जुलूस के दौरान उस समय भगदड़ मच गई, जब अचानक जुलूस में हाथी बेकाब हो गया। दरअसल, जुलूस में सैकड़ों लोग शामिल थे। इस दौरान उस लोग दहशत में आ गए, जब दशहरा उत्सव में शामिल हाथी ‘सोमन्ना’ बेकाबू हो गया और इधर-उधर भागने लगा। यह पहली बार था जब सोमन्ना को देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति वाली चांदी की ‘अंबारी’ (हाथी पर रखी जाने वाली सवारी) को ढोने की जिम्मेदारी दी गई थी। सोमन्ना यहां-वहां भागने लगा। उसकी पीठ पर रखी 650 किलो की अंबारी भी उसने गिरा दी। पास खड़ी गाड़ियां पलटा दीं।
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कई घंटों तक वह ऐसे ही तांडव करता था, तब जाकर उसे काबू किया जा सका। वन विभाग के अधिकारियों ने 35 वर्षीय इस हाथी को सकरेबैलु हाथी शिविर से मंगाया था। दरअसल, मुख्य हाथी ‘सागर’ के पैर में चोट लग गई थी, जिसके कारण आखिरी समय में सोमन्ना को उसकी जगह लाया गया। दोपहर करीब 2:30 बजे शिवमोग्गा के विधायक एस.एन. चन्नाबसप्पा द्वारा देवी चामुंडेश्वरी को फूल अर्पित करने के बाद जुलूस शुरू हुआ। गांधी बाजार इलाके में भारी भीड़ और अचानक हुए तेज शोर-शराबे से 35 वर्षीय हाथी घबरा गया। इस हंगामे से परेशान होकर सोमन्ना अपना आपा खो बैठा और तेजी से भागने लगा।
हाथी के हिंसक व्यवहार और अचानक तेजी से भागने के कारण, उसकी पीठ पर रखी चांदी की सजावटी अंबारी फिसलकर जमीन पर गिर गई। हाथी के बेकाबू होने से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हाथी के पीछे चल रहे पुलिसकर्मियों और वन विभाग के अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने और इलाके को सुरक्षित करने की कोशिश की। इसी बीच, पशु चिकित्सकों डॉ. आनंद और डॉ. मुरली मनोहर ने सोमन्ना को शांत करने के लिए उसे बेहोशी की दवा (सेडेटिव) दी, लेकिन फिर भी वह कुछ देर तक बेकाबू होकर भागता रहा।
सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए, अधिकारियों ने तुरंत जुलूस को रोक दिया। इसके बाद, ‘सागर’ और ‘बहादुर’ नाम के अन्य हाथियों की मदद से सोमन्ना को काबू में करने की कोशिश की गई। हाथी कोटे सीतारामंजनेय मंदिर के पास एक गली में चला गया, जहां उसे जंजीरों से बांध दिया गया। करीब 30 मिनट के तनाव के बाद स्थिति नियंत्रण में आई, जिससे वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस अफरा-तफरी के दौरान, देवी चामुंडेश्वरी को पहनाई गई सोने की छह चूड़ियां गायब हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि देवी चामुंडेश्वरी को कुल आठ सोने की चूड़ियां पहनाई गई थीं, जिनमें से केवल दो ही मिल पाईं, जबकि बाकी 6 गायब हैं। इस घटना में अंबारी को भी नुकसान पहुंचा और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई।
