नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। यह कोई पहली बार नहीं है जब नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप ने अपना नाम दिया है वो पहले भी कई बार अपना नाम इस पुरस्कार के लिए देते आ रहे हैं। ट्रंप ने इस बार व्हाइट हाउस से 8 युद्धों को सुलझाने के अपने रिकॉर्ड का जिक्र किया। उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि एक और बड़ी कामयाबी उन्हें इससे मिल सकती है। बीते दिन चुनाव प्रचार के बाद वॉशिंगटन लौटने पर ट्रंप ने मीडिया के साथ बात की। उन्होंने कहा कि – ‘मैंने ऐसे कई काम किए हैं जो किसी ने भी नहीं किए मैं कोई डींगें नहीं मार रहा बस आपको असलियत बता रहा हूं। शायद ही किसी राष्ट्रपति ने कभी युद्ध को सुलझाया हो मैंने 8 युद्ध सुलझा दिए हैं’।
मैं नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार हूं
ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए ईरान के साथ युद्ध खत्म होने का हिंट भी दिया। उन्होंने कहा कि – ‘उनकी लिस्ट में जल्द ही एक और संघर्ष जुड़ेगा। वहीं ईरान के साथ एक और युद्धविराम की दिशा में बहुत ही कम प्रगति दिखाई दी है’। ट्रंप की ये बातें नोबेल पुरस्कार पाने की कोई नई कोशिश नहीं थी हालांकि वो बार-बार यह कह रहे कि अपने डिप्लोमैटिक रिकॉर्ड के कारण से नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं परंतु उनके इस खत्म किए गए युद्धों की संख्या के दावों पर फैक्ट चेकर्स पर भी सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन संघर्षों का वो जिक्र कर रहे हैं कि उनमें से कई औपचारिक रुप से युद्ध नहीं थे। अलग-अलग विवादों में अमेरिका की भूमिका काफी अलग-अलग थी।
काफी समय से नोबेल पुरस्कार लेना चाहते हैं ट्रंप
ट्रंप काफी समय से नोबेल पुरस्कार लेना चाहते हैं। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने बार-बार उत्तर कोरिया के साथ कूटनीति कोशिशों की ओर ध्यान खींचा। 2018 में नॉर्वे के दो राजनेताओं का कहना है कि उत्तर कोरियाई के नेता किम जोंग-उन के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद उन्होंने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था।
ऑपरेशन सिंदूर को रोकने में अमेरिका का हाथ
डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार भारत और पाकिस्तान के बीच में तनाव को कम करने के लिए और समझौतों तक पहुंचने में अमेरिका की भूमिका का जिक्र किया है परंतु उनके दावों का सीधे तौर पर खंडन किया है। भारत ने उनके दावे को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच में सीजफायर करवाने के लिए अमेरिका ने मदद की थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका का कोई भी दखल नहीं था। सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों देशों में खुद बनी थी पर इसके बाद भी ट्रंप कई बार यह बोल चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर उन्होंने रुकवाया है।
