पंचकूला: मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। जब जिला पुलिस ने एक ब्रेन डेड मरीज द्वारा दान किए गए है। अंगों का गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक साथ तीन अलग-अलग रुटों को बेहद कम समय में चंडीगढ़ तक पहुंचाया गया।
समय की महत्ता को देखते हुए पंचकूला ट्रैफिक पुलिस ने एसएचओ वरिंदर कुमार के नेतृत्व में अपनी तत्परता दिखाई और सुनिश्चित किया कि एंबुलेंस बिना किसी बाधा के ट्रैफिक को पार कर सके। इस सफल ऑपरेशन के अंतगर्त पीजीआईएमआईआर चंडीगढ़ अपोलो अस्पताल दिल्ली और सेना के हवाई अड्डे के लिए अंगों की सुरक्षित रवानगी की गई।
पुलिस विभाग द्वारा की गई जानकारी के अनुसार, इस मिशन की शुरुआत दोपहर 2:30 बजे हुई। जब अपोलो अस्पताल की टीम को हवाई अड्डे से कमांड अस्पताल पहुंचाया गया है। इसके बाद शाम 5 बजे से 8 बजे के बीच सबसे जरुरी चरण शुरु हुआ है। ट्रैफिक पुलिस ने पीसीआर-9 के माध्यम से कमांड अस्पताल से मोहाली एयरपोर्ट पीसीआर-8 के जरिए से कमांड अस्पताल से मोहाली एयरपोर्ट के माध्यम से हाउसिंग बोर्ड चौक होते हुए पीजीआई चंडीगढ़ तक निर्बाध रास्ता प्रदान किया।
इस दौरान सैंकड़ों वाहनों को रोककर एंबुलेंस के लिए ग्रीन सिग्नल रखा गया। इससे अंगों की इस्केमिक टाइम के अंदर पहुंचना संभव हो चुका है। अंग दान एक महादान हैं और इसमें समय की एक-एक सैकंड की कीमत होती है। आज पंचकूला ट्रैफिक पुलिस के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण लेकिन संतोषजनक काम था कि हमें एक साथ तीन अलग-अलग दिशाओं में ग्रीन कॉरिडोर का प्रबंधन करना था।
कमांड अस्पताल से मोहाली एयरपोर्ट, टेक्निकल एयरपोर्ट चंडीगढ़ और पीजीआई चंडीगढ़ तक एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के पहुंचाने के लिए हमारे जवानों ने जी-जान लगा दी। हमारा उद्देश्य सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं बल्कि जीवन बचाने की इस जंग में एक सेतु की भूमिका निभाना भी है। हम अंग दाता के परिवार के साहस को नमन करते हैं और गर्व महसूस करते हैं कि पंचकूला पुलिस इस नेक कार्य में अपनी भूमिका समयबद्ध तरीके से निभा सकी।
