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कांग्रेसी लीडर Baweja पर चारा घोटाला के आरोप, पिता ने कहा- आस्था के नाम पर बेटे ने की ठगियां, देखें वीडियो

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लुधियानाः लुधियाना के सुंदर नगर स्थित किंग पैलेस में खत्री-अरोड़ा समाज की ओर से महासभा के बीच भारी हंगामा हो गया। दरअसल, सभा में मौजूदा मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन और कांग्रेसी सीनियर लीडर दर्शन लाल बवेजा पर उन्हीं के पिता बलवंत सिंह अरोड़ा ने गंभीर आरोप लगा डाले। इस दौरान बहसबाजी शुरू हो गई और माहौल गर्मा गया।

उन्होंने समाज से दर्शन लाल बवेजा उर्फ लड्डू, उनके बेटे और डीएम डेवलपर्स के सभी साझेदारों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग की। बलवंत सिंह ने कहा कि वे अपने ठग बेटे का असली चेहरा सामाज के सामने लाना चाहते थे, जिसके चलते वे इस सभा में आए। उन्होंने कहा कि बिहार के नेता लालू प्रसाद यादव की तरह दर्शन लाल बवेजा ने भी करोड़ों रुपए का चारा घोटाला किया है। आस्था के नाम पर ठगियां की है। इसी के साथ-साथ लोगों की जबरन जमीनें हड़पी और यहां तक कि जमीन के लालच में अपने आपाहिज भाई गुलशन लाल बवेजा और बुजुर्ग पिता बलवंत सिंह पर अदालती केस दायर कर दिए और पुलिस कमिश्नर को झूठी शिकायतें दे दी। जिसके चलते बुजुर्ग पिता इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगा रहे है।

बता दें कि इस महासभा का आयोजन समाज के सभी लोगों ने मिलकर किया था। समाज की कई नामी शख्शियतें इस दौरान मौजूद रही। गांव बौकड़ डोगरां के रहने वाले बलवंत सिंह अरोड़ा ने आरोप लगाते कहा कि उनका बेटा दर्शन लाल बवेजा उर्फ लड्डू का वास्तविक चेहरा समाज के सामने लाना जरुरी है। वह खुद को समाजसेवक, गौ सेवा आयोग का सदस्य, बाल गोपाल गौशाला का चेयरमैन, पक्षी सेवा सोसायटी का चेयरमैन, डीएम डेवलपर्स का संरक्षक तथा अनेक सामाजिक संस्थाओं का पदाधिकारी बताता है। उसकी ओर से समाज के साथ ही धोखा किया जा रहा है। उनका आरोप है कि अरोड़ा-खत्री समाज के लोगों द्वारा अपनी कमाई में कटौती कर गौशालाओं में दान देते हैं ताकि गायों के चारे की व्यवस्था हो सके। लेकिन लड्डू ने गौशालाओं को मिलने वाले दान के धन का अप्रत्यक्ष रूप से दुरुपयोग हुआ और यह मामला चारा घोटाले जैसी घटनाओं की याद दिलाता है।

बलवंत सिहं का आरोप है कि दर्शन लाल बवेजा और उसके पुत्र अरुण कुमार ने फिल्लौर स्थित गौशाला के पीछे एक योजना के तहत लगभग 24 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से जमीन खरीदी। बाद में उसी जमीन का हिस्सा श्री गोपाल गौधाम चैरिटेबल ट्रस्ट, फिल्लौर को लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपए में बेच दिया। आरोप लगाया है कि डीएम डेवलपर्स के साझेदार जोगा सिंह तथा अन्य साझेदारों द्वारा कथित फर्जी एनओसी के आधार पर रजिस्ट्रियां कराई गईं।

इस संबंध में थाना मोती नगर लुधियाना में एफआईआर दर्ज है। इसके अतिरिक्त मेरे अनुसार दर्शन लाल बवेजा उर्फ लड्डू के खिलाफ थाना लाडोवाल, सलेम टाबरी और मेहरबान में भी कई एफआईआर दर्ज हैं। इतने मामलों के बावजूद वह स्वयं को समाज का सम्मानित व्यक्ति बताता है।

बलवंत अरोड़ा का आरोप है कि दर्शन लाल बवेजा, उसके सहयोगियों तथा डी.एम. डेवलपर्स के साझेदारों के खिलाफ करोड़ों रुपए की स्टांप ड्यूटी चोरी, सीएलयू फीस, डेवलपमेंट फीस तथा कथित फर्जी या बिना एनओसी के सैकड़ों रजिस्ट्रियां कराने संबंधी शिकायतें जिला प्रशासन के पास लंबित हैं। इसके अलावा लुधियाना की सिविल और आपराधिक अदालतों तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी अनेक मुकदमे विचाराधीन हैं। उन्होंने आरटीआई के तहत इन मामलों की जानकारी प्राप्त की है। राजनीति छत्रछाया के चलते उसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा पाता।

बलवंत अरोड़ा का आरोप है कि डायन भी एक घर छोड़ देती है, लेकिन दर्शन लाल बवेजा उर्फ लड्डू ने अपने 92 वर्षीय पिता को भी नहीं बख्शा। उसने 28 अप्रैल पुलिस कमिश्नर लुधियाना को मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ कथित रूप से झूठी शिकायत दी। अगले ही दिन शिकायत जांच के लिए डीसीपी इन्वेस्टिगेशन को भेज दी गई और 30 अप्रैल, 2026 को मुझे तथा मेरे बेटे गुलशन लाल को सभी दस्तावेजों सहित बुला लिया गया। पिछले कई महीनों से हम लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि शिकायतकर्ता स्वयं किसी भी तारीख पर उपस्थित नहीं हुआ। जबकि उनके पास हर दस्तावेज मौजूद है। लेकिन पुलिस दबाव में है।

बलवंत अरोड़ा का आरोप है कि 12 वर्ष पहले भी दर्शन लाल बवेजा की ओर से उनके, उनके दिव्यांग पुत्र गुलशन लाल और उसकी पत्नी सिम्मी बवेजा के खिलाफ कथित रूप से झूठा मामला दर्ज कराया था। उस मामले में मेरे बेटे गुलशन लाल को 38 दिन जेल में रहना पड़ा। बाद में हाईकोर्ट ने मामला रद्द कर दिया। इस मामले से परेशान होकर सिम्मी बवेजा की असमय मृत्यु हो गई। मेरे छोटे बेटे शेर सिंह के साथ भी अन्याय हुआ।

दर्शन बवेजा ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे वन विभाग की लगभग 15 कनाल भूमि, जिसकी कीमत लगभग 50 करोड़ रुपए बताई जा रही है, वह अवैध कब्जा कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट में केस हारने के बावजूद आज तक वह भूमि सरकार को नहीं सौंपी। हालांकि दर्शन बवेजा ने इस मामले में कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।

 

 

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