सेहत: एआई टूल्स अब सिर्फ फैक्ट्रियों और ऑफिस तक ही नहीं रहे हैं। अब इनका इस्तेमाल किचन में भी हो रहा है। खाने की रेसिपी के साथ-साथ वजन कम करने के लिए यह पर्सनलाइज्ड मील का भी प्लान बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट्स का डाइट कोच के तौर पर ट्रीट कर रहे हैं। उनसे अपने लिए मील प्लान बनवा रहे हैं। ऐसे में अगर आप भी ऐसा कुछ करने की सोच रहे हैं तो थोड़ा संभल जाएं। थेरेपिस्ट का कहना है कि इससे चुनौतियां बढ़ जाएगी। यह फायदे की जगह आफत बन सकता है।
एआई बनेगा लोगों का डाइटिशियन
रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई चैटबॉट्स पर कई लोग अपनी तस्वीरें शेयर करके वजन कम करने और मसल्स गेन करने की टिप्स मांग रहे हैं। इसी तरह से कुछ लोग अपने खाने की फोटो शेयर करके उसका हेल्दी ऑप्शन पूछते हैं। ऐसी कई रिक्वेस्ट्स के जवाब में ये चैटबॉट लोगों को कार्बोहाइड्रेट कम करने, फास्ट रखने और बहुत ही कम कैलोरी वाला खाना की सलाह दे रहे हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी सामान्य सलाह खतरनाक हो सकती है। इससे लोगों को अनहेल्दी आदतें लगती है। एआई को यूजर की मेडिकल हिस्ट्री और मेंटल हेल्थ कंडीशन की जानकारी नहीं होती है। इसका कारण यह भी खाने से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को और मुश्किलों में डाल सकती है।
इटिंग डिसऑर्डर बना मुश्किल
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भले ही लोग एआई चैटबॉट्स को एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि परंतु यह जरुरी है कि चीजों में अंतर नहीं कर पाता। किसी एआई चैटबॉट के लिए फिटनेस रुटीन फॉलो करने वाले इटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों में अंतर कर पाना बहुत मुश्किल है।
रिकवरी के लिए रहें एआई पर निर्भर
एआई के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए थेरेपिस्ट का कहना है कि लोगों को एक जरुरी चीज याद रखनी चाहिए। एआई चेटबॉट आपके कई सवालों का जवाब दे सकता है परंतु यह जटिल इमोशन, मेडिकल हिस्ट्री और ईटिंग डिसऑर्डर के पीछे के स्ट्रगल को नहीं समझ सकता है इसलिए इटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों के लिए इंसानी केयर और एक्सपर्ट्स ट्रीटमेंट जरुरी है। सिर्फ एआई के सहारे रिकवरी नहीं हो सकती है। यह फायदे से ज्यादा नुकसान का कारण भी बन सकती है।

