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मुख्यमंत्री मांवां-धियां सत्कार योजना’ ने पंजाब की महिलाओं में जगाई उम्मीद, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई किरण

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चंडीगढ़: पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री माँवां-धियां सत्कार योजना’ ने पूरे राज्य की महिलाओं में उत्साह की नई लहर पैदा कर दी है। अनेक महिलाओं के बैंक ख़ातों में योजना की राशि पहुँच चुकी है, जबकि अन्य महिलाएँ भी राशि मिलने का इंतजार कर रही हैं। पंजाब की हज़ारों महिलाओं के लिए यह पहली राशि ,आर्थिक सहायता से कहीं बढ़कर है। वर्षों से टलती आ रही इच्छाओं को पूरा करने, बच्चों की शिक्षा में सहयोग देने, अपने स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखने और सबसे बढ़कर अपने ही बैंक ख़ाते में सीधे पैसे आने से मिलने वाले सम्मान का अनुभव करने का अवसर है।

गांव अदालतपुर की 40 वर्षीय गगनदीप कौर अपने ख़ाते में राशि आने से बेहद ख़ुश हैं। उन्होंने कहा, “मेरे खाते में ₹3,000 आए हैं। मैंने अभी तक यह राशि ख़र्च नहीं की है क्योंकि मैं इसे केवल अपने बेटे पर ख़र्च करना चाहती हूँ। वह जो भी माँगेगा, मैं अपने पैसों से उसे दिलाऊँगी। जब मेरा बच्चा खुश होता है तो मुझे भी ख़ुशी मिलती है। आगे मिलने वाली हर राशि मैं उसी पर ख़र्च करूँगी।”उन्होंने मुस्कुराते हुए आगे पंजाबी में कहा, “जो ओह मंगूगा, ओही ले के दवांगी।” (वह जो भी माँगेगा, मैं उसे वही ख़रीदकर दूँगी)

इच्छेवाला गाँव की घरेलू कामगार सोमा के लिए ₹4,500 जमा होने का संदेश राहत और ख़ुशी दोनों लेकर आया। उन्होंने कहा, “मैं बहुत गरीब हूँ, लेकिन इस सरकार ने महिलाओं के ख़ातों में सीधे पैसे भेजकर बहुत अच्छा काम किया है। इससे हमें सुरक्षा और आत्मसम्मान मिलता है। अगर नकद पैसे दिए जाते तो परिवार के दूसरे सदस्य उन्हें ले सकते थे, लेकिन अपने बैंक ख़ाते में पैसा होने से आर्थिक सुरक्षा भी मिलती है।”

कम हीमोग्लोबिन और ख़राब स्वास्थ्य से जूझ रही सोमा ने पहले से तय कर रखा है कि वे इस राशि का उपयोग कैसे करेंगी। उन्होंने कहा, “मैं पौष्टिक भोजन ख़रीदूँगी। डॉक्टरों ने हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए चुकंदर और मेवे खाने की सलाह दी है। मैं ड्रैगन फ्रूट भी ख़रीदूँगी। यह फल मैंने पहली बार ‘द कपिल शर्मा शो’ में देखा था। तब तक मुझे लगता था कि इसे केवल अमीर लोग ही खाते हैं। अब मैं ख़ुद भी इसका स्वाद चखूँगी।” यह कहते हुए वे हँस पड़ीं।

सोमा की बेटी, जिसने हाल ही में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की है और अब कॉलेज में प्रवेश ले रही है,ने भी इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है। सोमा ने कहा, “हम दोनों को मिलाकर हर तीन महीने में कुल ₹6,000 मिलेंगे। मेरी बेटी काफ़ी समय से कॉलेज के लिए नए कपड़े, एक अच्छी सलवार-कमीज़ और सैंडल की माँग कर रही थी। मेरे पति बेरोज़गार हैं, इसलिए हमारे घर में हमेशा पैसों की तंगी रहती है। मैं इसे हर बार टालती रही। अब मैं उसकी यह इच्छा पूरी कर सकूँगी और उसकी किताबों के लिए भी हम कुछ पैसे बचा पाएँगे।” सोमा की छह बेटियाँ हैं।

जब सोमा और उनकी दो देवरानियों रीतु और ज़ीना के मोबाइल फ़ोन पर पैसे जमा होने का संदेश आया तो तीनों ख़ुशी से झूम उठीं और नाचने लगीं। संयुक्त परिवार में रहने वाली इन तीनों महिलाओं को मिलाकर कुल ₹13,500 की सहायता राशि प्राप्त हुई , जिससे परिवार की कई तत्काल ज़रूरतें पूरी हो सकेंगी। सुनाम की 53 वर्षीय गृहिणी रेणु के लिए यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हम ख़ुद कमाते नहीं हैं। घर के छोटे-छोटे ख़र्चों के लिए भी हमें अपने पति या बेटों पर निर्भर रहना पड़ता है। मेरी दो बेटियाँ शादीशुदा हैं। इस पैसे से मैं मिठाई, स्नैक्स और फल खरीदकर दोनों बेटियों को घर बुलाना चाहती हूँ। इस बार मेहमाननवाज़ी मैं अपने पैसों से करूँगी।”

47 वर्षीय सविता इस सहायता राशि को बचत शुरू करने के एक अवसर के रूप में देखती हैं। उनके पति दो वर्ष पहले गंभीर हृदय रोग से पीड़ित होने के बाद से काम करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी भी इस योजना के लिए पात्र है, इसलिए हम दोनों को मिलाकर कुल ₹6,000 मिलेंगे। मेरी योजना है कि मैं हर महीने ₹1,000 डाकघर की बचत योजना में जमा करूँगी, जबकि मेरी बेटी अपने हिस्से की राशि उन छोटी-छोटी व्यक्तिगत ज़रूरतों को पूरा करने में ख़र्च कर सकेगी, जिन्हें वह अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।”

बठिंडा में तीन घरों में घरेलू काम करने वाली जसबीर कौर के लिए यह योजना उनकी बेटी की उच्च शिक्षा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, “मैं अनुसूचित जाति वर्ग से हूँ, इसलिए मुझे ₹1,500 प्रति माह मिलने चाहिए थे, लेकिन मैं आवेदन के समय जाति प्रमाण पत्र अपलोड नहीं कर सकी क्योंकि मैंने अभी तक प्रमाण पत्र बनवाया ही नहीं था। अब मैं प्रमाण पत्र बनवाकर सरकार से अपनी श्रेणी अपडेट करने का अनुरोध करूँगी। ₹1,000 प्रति माह भी बहुत मायने रखते हैं। मेरी बेटी बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश ले रही है और मैं यह राशि उसकी एडमिशन पर ख़र्च करूँगी।”

गुरदासपुर की 55 वर्षीय राज ने अपनी प्राप्त राशि में से कुछ पैसे पहले ही निकाल लिए हैं। उन्होंने कहा, “मेरे ख़ाते में ₹3,000 आए हैं, लेकिन अभी मैंने केवल ₹1,000 निकाले हैं। यह पूरा पैसा मेरी दवाइयों पर ख़र्च होगा। मैं अक्सर बीमार रहती हूँ और इलाज पर काफ़ी ख़र्च आता है। अब कम-से-कम दवाइयाँ ख़रीदने के लिए मुझे किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।” वह शेष राशि को बाद में अपनी दवाइयों और इलाज से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रखना चाहती हैं, क्योंकि वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा, “मेरी टाँगों में बहुत दर्द रहता है और मैं ठीक से चल भी नहीं पाती। अब यह पैसा मैं अपनी दवाइयों और विटामिन पर ख़र्च करूँगी।”

यह योजना आम आदमी पार्टी के प्रमुख चुनावी वादों में से एक को पूरा करती है। नवंबर 2021 में मोगा में आयोजित एक जनसभा के दौरान तत्कालीन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वादा किया था कि यदि पंजाब में उनकी सरकार बनी तो महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। पंजाब के गाँवों और शहरों से सामने आ रही कहानियाँ बताती हैं कि यह राशि भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन इसका महत्त्व केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। किसी के लिए यह बच्चों की शिक्षा का सहारा है, तो किसी के लिए बेहतर स्वास्थ्य, बचत, पारिवारिक ख़ुशियों और आयोजनों का माध्यम। कई महिलाओं के लिए यह अपने नाम के बैंक ख़ाते से अपनी ज़रूरतों पर ख़र्च करने की संतुष्टि का अनुभव है।

 

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