पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली के खिलाफ पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिले में दो ट्रकों में लदी भारी मात्रा में थाई मांगुर मछली पकड़ी गई। इसके बाद प्रशासन ने बायसी के डंगराहा इलाके में नदी किनारे गड्ढा खोदकर पूरी मछली को दफना दिया। अधिकारियों का यह कहना है कि यह मछली भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके सेवन से लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ेगा।
साल 2000 में प्रतिबंध लगाया था
थाई मांगुर जिसको वैज्ञानिक भाषा में क्लेरियस गैरोपिनस कहते है। एक विदेशी कैटफिश प्रजाति है। भारत में इसकी खेती, बिक्री और खाने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने साल 2000 में प्रतिबंध लगा दिया था। इसके पीछे मुख्य कारण पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाला बुरा असर है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का बढ़ेगा खतरा
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह मछली बेहद गंदे और प्रदूषित पानी में भी जिंदा रह सकती है। कई जगहों पर इसे सड़े-गले मांस और खराब चीजें खिलाकर पाला जाता है। ऐसे में इसके शरीर में सीसा, पारा और आर्सेनिक जैसे खतरनाक तत्व पाए जाते हैं। डॉक्टर भी इस मछली के सेवन से बचने की सलाह देते हैं। थाई मांगुर पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा माना जाता है। यह मांसाहारी और आक्रामक प्रजाति है। यह तालाब और नदियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर भी इस मछली के सेवन से बचने की सलाह देते हैं।
पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा
थाई मांगुर पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा माना जाता है। यह मांसाहारी और आक्रामक प्रजाति है जो तालाब और नदियों में रहने वाली देसी मछलियों और छोटे जलीय जीवों को खा जाती है। शोध के अनुसार, इस प्रजाति के कारण भारत की कई स्थानीय मछलियों को संख्या तेजी से कम हुई है। यही कारण है कि सरकार ने इसकी खेती और बिक्री पर रोक लगाई है।
इसके बाद कम लागत और ज्यादा मुनाफे के कारण कई जगहों पर इसकी अवैध खेती और बिक्री अब भी जारी है। यह मछली जल्दी बढ़ती है। खराब परिस्थितियों में भी जीवित रहती है इसलिए कुछ लोग चोरी-छिपे इसका कारोबार करते हैं।
पूर्णिया पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध मछली कारोबारियों में हडकंप मचा हुआ है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वो प्रतिबांधित मछलियों की खरीद-बिक्री से दूर रहे हैं और किसी भी अवैध कारोबार की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
