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कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम विषय पर हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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चंडीगढ़: हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में आज कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं निवारण अधिनियम, 2013 के संबंध में एक संवेदनशीलता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कमीशन में सम्मानजनक, सुरक्षित एवं लैंगिक संवेदनशील कार्य वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाना था। इस अवसर पर कमीशन के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी, आंतरिक शिकायत समिति के सदस्य तथा ग्रुप-ए से लेकर ग्रुप-डी तक के कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के महिला अध्ययन एवं विकास विभाग-सह-केंद्र की प्रोफेसर डॉ. मनविंदर कौर ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं निवारण अधिनियम, 2013 से संबंधित कानूनी प्रावधानों, महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों तथा व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विषय की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उनका प्रस्तुतीकरण संवादात्मक एवं सहभागी रहा, जिससे उपस्थित कर्मचारियों को विषय की गहन समझ प्राप्त हुई।

सत्र के दौरान प्रतिभागियों को अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, आंतरिक शिकायत समिति की संरचना एवं उसकी जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। डॉ. कौर ने भारतीय न्यायालयों द्वारा “कार्यस्थल” की विकसित होती परिभाषा पर भी प्रकाश डाला और बताया कि वर्तमान समय में वर्चुअल प्लेटफॉर्म, रिमोट वर्क तथा सोशल मीडिया मंचों को भी कार्यस्थल की परिधि में माना जा रहा है।

उन्होंने उन कारणों पर भी चर्चा की जिनके चलते कई बार पीड़ित शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचाते हैं। साथ ही शिकायतकर्ता एवं प्रतिवादी दोनों के लिए उपलब्ध प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों, समयबद्ध शिकायत निवारण, शून्य-सहिष्णुता नीति तथा संस्थागत जवाबदेही के महत्व को रेखांकित किया। लैंगिक समानता एवं सुरक्षित कार्यस्थल का निर्माण केवल कानूनी दायित्व नहीं बल्कि प्रत्येक संस्था और व्यक्ति की साझा नैतिक जिम्मेदारी भी है। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कार्यस्थल पर सम्मान, संवेदनशीलता एवं समानता की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया। साथ ही यह संदेश दिया गया कि लैंगिक समानता की दिशा में सबसे प्रभावी परिवर्तन व्यक्तिगत स्तर पर सोच एवं व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने से संभव है।

 

 

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