चंडीगढ़ः केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू आज एससी आयोग के समक्ष पेश हुए। जहां उन्होंने जातिसूचक शब्द को लेकर की गई टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया। दरअसल, आयोग ने उन्हें तलब किया था। इससे पहले वह दो बार सुनवाई में पेश नहीं हुए थे, जिसके चलते आयोग के चेयरमैन जसबीर सिंह गढ़ी ने सख्त रुख अपनाते हुए आज पेश होने के लिए नोटिस जारी किया था।
आज एससी आयोग के समक्ष सुनवाई की शुरुआत में आयोग के अध्यक्ष ने केंद्रीय मंत्री बिट्टू को उनकी वह आपत्तिजनक वीडियो दिखाई, जिसमें उन्होंने अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित विवादास्पद बयान दिया था। इस पर आयोग ने उनसे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। बिट्टू ने जातिसूचक टिप्पणी मामले में उन्होंने वकीलों के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मेरे शब्द 100 फीसदी कानूनी तौर पर गलत थे। मैंने इस करके माफी भी मांगी। वहीं एससी आयोग द्वारा बिट्टू को चार धार्मिक स्थलों पर नतमस्तक होने के आदेश दिए गए।
मैंने अपने अकाउंट से वीडियो भी डिलीट कर दी थी। बिट्टू ने कहा कि उन्हें सबसे पहले संगरूर में एक एसपी रैंक के अधिकारी ने रोका था। उस अधिकारी ने बताया कि ओएसडी ओंकार को बलिया थाने में हिरासत में रखा गया है। इसके बाद वह बलिया थाने पहुंचे, जहां उन्हें फिर बताया गया कि ओंकार को संगरूर ले जाया गया है। बिट्टू के अनुसार वह दोबारा संगरूर पहुंचे, लेकिन वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने उनका रास्ता रोकते हुए कहा कि ओंकार धूरी में है।
इसके बाद वह धूरी पहुंचे, जहां एक एसएचओ रैंक के अधिकारी ने उनकी गाड़ी के सामने वाहन लगाकर रास्ता रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ बदतमीजी की गई और कुछ ऐसे शब्द कहे गए, जिनसे वह आहत हुए। बिट्टू ने कहा कि उस समय हालात तनावपूर्ण थे और पुलिस के व्यवहार से वह भावुक हो गए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि उनकी ओर से भी कोई आपत्तिजनक शब्द निकले हों, तो इसके लिए वह मीडिया के सामने पहले ही माफी मांग चुके हैं। बिट्टू ने कहा कि उस पार्टी से आता हूं जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पैर धोए थे।
