पंचकूलाः हरियाणा में 661 करोड़ रुपए के IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले मामले में सीबीआई ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। दरअसल, सीबीआई ने 2 सीनियर आईएएस की गिरफ्तारी के बाद हरियाणा पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के कर्मचारी सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के अनुसार, सौरभ हरियाणा पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के अकाउंट ब्रांच में डाटा एंट्री ऑपरेटर है। गिरफ्तार के बाद उसे पंचकूला की जिला अदालत में पेश गया, जहां से उसका चार दिन का रिमांड मिला है। एजेंसी का दावा है कि सौरव शर्मा ने निजी बैंकों को अनुचित लाभ पहुंचाने, सरकारी धन के निवेश नियमों की अनदेखी करने और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिटाने में भूमिका निभाई।
उधर, अभी तक इस मामले में दो आईएएस आरके सिंह और पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी हो चुकी है। फिलहाल, सीबीआई पंकज अग्रवाल से रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान सीबीआई को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के मैनेजर और घोटाले के मास्टरमाइंड रिभव ऋषि तथा पंकज अग्रवाल के बीच हुई फोन बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली थी। इस बातचीत में रिभव ऋषि ने पंकज अग्रवाल से 10 करोड़ रुपए एक बिल्डर के खाते में ट्रांसफर करने की बात कही थी। सूत्रों का दावा है कि अग्रवाल की सहमति मिलने के बाद जनवरी में उक्त राशि बिल्डर के खाते में ट्रांसफर की गई थी।
इस रिकॉर्डिंग के बाद ही सीबीआई ने पंकज पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। यह भी आरोप है कि पंकज अग्रवाल ने बिना कोटेशन और प्रोसेस के कोटक बैंक से 100 करोड़ रुपए आईडीएफसी बैंक में खुलवाए गए खाते में ट्रांसफर करवाए थे। फिलहाल पंकज अग्रवाल दो दिन के रिमांड पर हैं। सीबीआई ने अदालत को बताया कि सौरव शर्मा HSPCB में डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था और उसे सरकारी धन निवेश से जुड़े वित्त विभाग के नियमों और सीमाओं की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उसने कथित रूप से निजी बैंक के पक्ष में निवेश प्रस्तावों को प्रोसेस करने में सहायता की।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सरकारी धन जमा करने की सीमा 50 करोड़ रुपये थी, लेकिन मार्च 2025 में यह राशि बढ़कर 67.9 करोड़ रुपये पहुंच गई। बाद में जून 2025 में यह निवेश 105.68 करोड़ रुपये और अक्टूबर 2025 में 113.68 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सीबीआई के दस्तावेजों के मुताबिक, 13 मार्च 2025 से 13 फरवरी 2026 के बीच खाते से कई संदिग्ध डेबिट ट्रांजेक्शन हुए, जिनके जरिए करीब 187.26 करोड़ रुपये विभिन्न शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए। कुछ क्रेडिट एंट्री के बाद भी सरकारी खाते को 169.35 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। एजेंसी का आरोप है कि निवेश के बाद धन को शेल कंपनियों के माध्यम से बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर सरकारी धन की हेराफेरी हुई।
