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स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए 18 करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों और दर अनुबंधों को दी मंजूरी : आरती सिंह राव

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चंडीगढ़- हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर कदम उठा रही है। उनकी अध्यक्षता में हुई “स्पेशल हाई पावर्ड परचेज कमेटी” की बैठक के बाद जानकारी दी कि  इस बैठक में समिति ने पूरे राज्य में चिकित्सा व्यवस्था और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए 18 करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों और दर अनुबंधों (रेट कॉन्ट्रैक्ट्स) को अंतिम रूप देते हुए उन्हें मंजूरी दी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बैठक के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनमें लगभग 1.85 करोड़ रुपये की लागत से 40 यूनानी दवाओं की खरीद, मोतियाबिंद के ऑपरेशनों के लिए 44 लाख रुपये के इंट्राओकुलर लेंस (IOL) और थैलेसीमिया के मरीजों के लिए 82 लाख रुपये की दवाएं शामिल हैं।

इसके अलावा स्वास्थ्य ढांचे को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने के लिए समिति ने 18 जिला नागरिक अस्पतालों में 18 लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) प्लांट और टैंकों की स्थापना व खरीद के लिए लगभग 9.55 करोड़ रुपये के 2 साल के दर अनुबंध को भी अंतिम रूप दिया है। साथ ही, 22 जिला नागरिक अस्पतालों के लिए 24 प्योर टोन ऑडियोमीटर की खरीद हेतु 3.02 करोड़ रुपये के 2 साल के रेट कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी गई है। वहीं सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत राज्य के 16 उप-मंडल नागरिक अस्पतालों में हीमोडायलिसिस सेवाएं प्रदान करने के लिए लगभग 2.40 करोड़ रुपये के टेंडर को भी स्वीकृत किया गया है।

आरती सिंह राव ने कहा कि चिकित्सा सामग्रियों और बुनियादी ढांचे की खरीद से हरियाणा के विभिन्न वर्गों के मरीजों को तत्काल राहत और बेहतर जीवन स्तर मिलेगा। उदाहरण के लिए, थैलेसीमिया के मरीजों के लिए दवाओं की उपलब्धता से इस आनुवंशिक रक्त विकार से जूझ रहे लोगों को बिना किसी रुकावट के निरंतर उपचार मिल सकेगा, जो उनके जीवन के लिए बेहद जरूरी है। इसी तरह, मोतियाबिंद के ऑपरेशनों के लिए इंट्राओकुलर लेंस (IOL) की बड़े पैमाने पर खरीद से बुजुर्गों और मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को बिना किसी लंबे इंतजार के, सरकारी सहायता से सस्ती और सुलभ सर्जरी की सुविधा मिलेगी। साथ ही, यूनानी दवाओं की खरीद से मरीजों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर ही वैकल्पिक और समग्र (holistic) चिकित्सा के अधिक विकल्प मिल सकेंगे।

दूसरी ओर, चिकित्सा बुनियादी ढांचे में किए जा रहे इन दीर्घकालिक सुधारों से जिला और उप-मंडल स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता काफी बढ़ जाएगी। 18 जिला अस्पतालों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) प्लांट लगने से गंभीर रूप से बीमार मरीजों और आपातकालीन सर्जरी के मामलों में ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत कम हो जाएगी। इसके अलावा, ऑडियोमीटर की मदद से कानों और सुनने की समस्याओं की शुरुआती जांच स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी। वहीं, 16 उप-मंडल अस्पतालों में पीपीपी मॉडल के तहत डायलिसिस सेवाएं शुरू होने से किडनी के मरीजों को अपने घर के पास ही जीवन रक्षक इलाज मिल सकेगा, जिससे उन्हें दूरदराज के चक्कर काटने और महंगे निजी इलाज के आर्थिक बोझ से बड़ी राहत मिलेगी। ये सभी निर्णय राज्य के नागरिकों को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने तथा चिकित्सा बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के प्रति हरियाणा सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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