नई दिल्ली: ईरान पर हमले की तैयारी में मिडिल ईस्ट पहुंच रहे अमेरिका के दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड के सामने कई दिक्कतें भी आ रही हैं। सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि विमान वाहक युद्धपोत पर तैनात करीबन 4,000 सैनिकों को टॉयलेट की कमी और चोक सीवेज से जूझना पड़ रहा है। इससे उनकी सेहत भी बिगड़ने लग गई है।
दुनिया के सबसे खतरनाक यूएस नेवी के हाईटेक और महंगे न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड में हजारों सैनिकों के सामने शौच का संकट खड़ा हो गया है हालात यह हो चुके हैं कि यूएसएस फोर्ड के चालक दल को शौचालय के लिए 45 मिनट तक लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। दल को शौचालय के लिए 45 मिनट तक लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी शक्ति प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया इतिहास का सबसे महंगा विमानवाहक पोत अफने ही क्रू के लिए बुनियादी स्वच्छता सुविधाएं प्रदान नहीं कर पा रहा है। करीबन 13 अरब डॉलय यानी की 1.18 लाख करोड़ रुपये की लागत से बने इस जहाज पर 4,600 नाविकों को रखने की क्षमता है परंतु इसमें काफी शौचालय खराब पड़े हैं। यह समस्या जहाज के वैक्यूम कलेक्शन, होल्डिंग एंड ट्रांसफर सिस्टम से जुड़ी हुई है। यह क्रूज जहाजों से प्रेरित है और कम पानी का इस्तेमाल करते हैं।
45 मिनट तक करना पड़ा इंतजार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 से अभी तक 42 बार बाथरुमों की मरम्मत के लिए बाहरी मदद मांगी गई है। 2025 में 32 बार शिकायत की गई। एक ई-मेल में चार दिनों में 205 ब्रेकडाउन दर्ज किए गए हैं। इसके बाद भी इस समस्या को दूर नहीं किया जा सकता है। इंजीनियरिंग टीम को 19-19 घंटे की शिफ्ट करनी पड़ रही है। ऐसे में कई बार 90 फीसदी शौचालय काम नहीं करते हैं। इससे नाविकों को 45 मिनट तक लाइन में इंतजार करना पड़ रहा है।
ट्रंप प्रशासन के ईरान पर हमले की धमकियों के बीच में टॉयलेट क्राइसिस अमेरिकी नौसेना की तैयारियों पर सवाल भी उठ रहे हैं। दुनिया का सबसे शक्तिशाली विमानवाहक जहाज दुश्मन से पहले अपने शौचालयों से जूझ रहा है। युद्ध की तैयारियों के बीच अमेरिकी नौसैनिकों के लिए ये बड़ी समस्या है। ऐसे में उनकी तबीयत खराब होने के कारण ईरान पर हमला करने की अमेरिकी क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
