चंडीगढ़ः नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा का आज (6 नवंबर) पीजीआई चंडीगढ़ में पोस्टमॉर्टम होगा। मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी से देर रात 12 बजे परविंदर झोटा के पार्थिव शरीर को पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया। ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए झोटा के पार्थिव शव को मोर्चरी से बाहर निकाला गया। इसके बाद आधुनिक सुविधाओं से लैस आईसीयू, वेंटिलेटर और फ्रीजर वाली एंबुलेंस में पार्थिव शरीर को रखकर चंडीगढ़ भेजा गया।
परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए चल रहे संघर्ष के 23वें दिन पंजाब सरकार और एक्शन कमेटी के बीच सहमति बनी थी। परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा और नौकरी देने का भरोसा दिया गया। दलजीत सिंह भम्मे के परिवार को भी नौकरी और मुआवजा देने का भरोसा दिया गया है।
वहीं झोटा के पिता ने पंजाब सरकार और मीटिंग में शामिल कैबिनेट मंत्रियों से मांग की है कि बेटे के पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार से पहले मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी का तबादला किया जाए। झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा कि बेटे की हत्या के लिए एसएसपी वैभव चौधरी भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने समय रहते नशा तस्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं, हत्या के बाद भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से नहीं निभाई।
इससे पहले बुधवार रात को झोटा के पिता भीम सिंह व इंसाफ कमेटी का सरकार से समझौता हो गया। सरकार ने उन्हें झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर को सरकारी नौकरी और 2 करोड़ का मुआवजा देने का भरोसा दिया। समझौते को लेकर कई सवाल उठे कि उन्होंने सीएम भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे की मांग क्यों छोड़ दी?। क्या सरकारी नौकरी और 2 करोड़ लेकर समझौता कर दिया?। सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस छिड़ी है। हालांकि इसके उलट झोटा की हत्या में इंसाफ का एक बड़ा कानूनी पहलू भी है, जिसमें दोषियों को सजा दिलाने में पोस्टमॉर्टम को लेकर हो रही देरी मुश्किल बन सकती थी।
