अमृतसरः अजनाला स्थित आईडीबीआई ने बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ देश भर में बैंक कर्मचारियों द्वारा दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। हड़ताल में बैंक के कर्मचारी भी शामिल हुए और बैंक के निजीकरण पर अपना विरोध दर्ज कराया। इस संबंध में जानकारी देते हुए बैंक के मैनेजर विकास गुप्ता ने बताया कि देश स्तर पर चल रहे इस संघर्ष का मुख्य उद्देश्य आईडीबीआई है। उन्होंने कहा कि बैंक का सार्वजनिक स्वामित्व बरकरार रखना और निजीकरण का निर्णय रद्द करना है।
विकास गुप्ता ने कहा कि बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के संगठन ने 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। संगठन के मुताबिक, हड़ताल के पहले दिन देशभर में 10 हजार से ज्यादा आई.डी.बी.आई. बैंक कर्मियों ने भाग लिया। इसके साथ ही अन्य बैंक यूनियनों ने भी इस संघर्ष का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मुख्य मांग आई.डी.बी.आई. बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया को रद्द किया जाए और बैंक का सार्वजनिक क्षेत्र का स्वरूप बरकरार रखा जाए।
उन्होंने कहा कि बैंक के स्वामित्व के संबंध में कोई भी निर्णय बैंक की संपत्ति, उसके विशाल शाखा नेटवर्क, बड़े ग्राहक आधार और वित्तीय प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ लिया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से बैंक को बेचने के प्रस्ताव को वापस लेने और इसके सार्वजनिक स्वामित्व को संरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में सार्वजनिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके स्वामित्व के संबंध में निर्णय लेते समय कर्मचारियों, ग्राहकों और देश की अर्थव्यवस्था के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
बता दें कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के खिलाफ यह हड़ताल 3 नवंबर को भी जारी रहेगी। बैंक कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार से कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और निजीकरण को लेकर फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इस मौके पर सुनील जाखड़, नवीन कुमार, जितिंदर कुमार, जानवी अरोड़ा आदि मौजूद थे।
